हमें फख्र है कि हम हिंदुस्तानी हैं (मौलाना मोहम्मद हशिम अशरफी

कानपुर 13 / अगस्त – सवतंत्र दिवस खुशियों का कौमी त्यौहार है इस अवसर पर तिरंगा फहराने से मुल्क की मुहब्बत ज़ाहिर होती है जांबाज़ उल्माए अहले सुन्नत में खास तौर से शाह अब्दुल अज़ीज़ मुहद्दिसे देहलवी अ.र. ने सन 1772 ई० में अंग्रेजों के खिलाफ जिहाद का फ़तवा देकर जंगे आज़ादी की तहरीक का आगाज़ फरमा दिया था यह समझना कि 1857 ई० में मंगल पांडे की क्रांति अंग्रेजों के खिलाफ पहली जंग है यह तारीख़ी हकीकत पर पर्दा डालना है | इन विचारों को कौन्सिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद हाशिम अशरफ़ी ने आला हज़रत रोड चिश्ती नगर में आल इंडिया ग़रीब नवाज़ कौन्सिल के तत्वाधान में आयोजित ‘’मुल्क की आज़ादी और उलमा-ए-अहले सुन्नत की कुर्बानी’’ नामी प्रोग्राम में व्यक्त किये | श्री अशरफी ने कहा मुल्क की आज़ादी में हज़ारों उलमा को फाँसी दी गयी बहुतों को काले पानी की सज़ा हुई मगर उलमा पीछे नहीं हटे और डट कर आखरी दम तक मुल्क की आज़ादी के लिए लड़ते हुए शहीद हो गए उन्हों ने कहा कि जांबाज़ बहादुरों में से एक नाम अल्लामा फजले हक खैराबादी का है उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ जिहाद का फतवा दिया और 1857 की जंग में बहादुर शाह ज़फर के साथ थे जिस की वजह से अंग्रेजों ने आप को काले पानी की सज़ा दी और आप का इन्तिकाल हो गया वहीँ आप का मज़ार है इसी तरह शाह वली उल्लाह मोहद्दिसे देहलवी,मौलाना हसरत मोहानी,मौलाना अब्दुल जलील,मौलाना मो.फैज़ अहमद बदायुनी,मौलाना इनायत अहमद काकोरवी,अल्लामा फजल इमाम खैराबादी,मौलाना अहमद उल्लाह शाह मद्रासी,मौलाना किफ़ायत अली काफी मुरादाबादी,मुफ़्ती सद्रुद्दुइन आज़ुर्दा,मौलाना रजा अली बरेलवी,मुफ़्ती मजहर करीम दरयाबादी,मौलाना लियाक़त अली इलाहाबादी,मौलाना वहाजुद्दीन मुरादाबादी,मौलाना लुत्फुल्लाह अलीगढ़ी,क़ाज़ी फैज़ुल्लाह कश्मीरी,मौलाना कासिम दानापुरी आदि उलमा-ए अहले सुन्नत की एक लम्बी फेहरिस्त है जिन्हों ने अपने कलम और तकरीरों से कौम के अन्दर वतन पर जान कुर्बान करने का जज़बा पैदा कर दिया और खुद भी वतन पर जान कुर्बान करके अमर हो गए मौलाना मोहम्मद महताब आलम कादरी मिस्बाही शहरी सदर काउन्सिल ने भी विचार व्यक्त किये | कारी मो.अहमद ने देश भक्ति का गीत पढ़ा जिस से माहौल खुशगवार हो गया | इस से पूर्व प्रोग्राम का आगाज़ कुरान पाक की तिलावत से हाफिज मिन्हाजुद्दीन क़ादरी शहरी जनरल सेक्रेटरी ने किया | संचालन हाफिज मोहम्मद अरशद अशरफ़ी ने किया | हाजी सय्यद खुर्शीद आलम,हसन शिबली अशरफी, माजिद अली ने नातें पढ़ीं मोहम्मद अली ठेकेदार ने मेहमानों का शुक्रिया अदा किया सलातो सलाम और मुल्क की तरक्की व खुशहाली की दुआओं के साथ जलसा ख़त्म हुआ इस अवसर पर प्रमुख रूप से मौलाना गुल मोहम्मद,क़ारी अजीमुद्दीन ,मास्टर इकबाल अहमद,मास्टर नोमान अख्तर,शेर खान,हाजी मो.असलम,मो.मुश्ताक, हाफिज बहरुद्दीन,मो.अशफाक, गुड्डू भाई,मुस्तकीम अहमद आदि उपस्थित रहे

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