कानपुर। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) कानपुर जिला कमेटी द्वारा शिक्षा, रोजगार और छात्र अधिकारों से जुड़ी सात सूत्रीय मांगों को लेकर राम आसरे भवन, कालपी रोड पर आयोजित 24 घंटे की भूख हड़ताल एवं अनशन शनिवार को समाप्त हो गया। नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के समर्थन में आयोजित इस कार्यक्रम में छात्र-युवाओं, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न लोकतांत्रिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर शिक्षा व्यवस्था और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर चिंता व्यक्त की।
वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा का बढ़ता निजीकरण, प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताएं, आरटीई प्रवेश प्रक्रिया की खामियां, सरकारी विद्यालयों की बदहाल स्थिति, सार्वजनिक परिवहन में छात्र रियायत का अभाव तथा रोजगार के सीमित अवसर आज छात्रों के सामने गंभीर चुनौतियां हैं। इन मुद्दों पर सरकार को संवेदनशीलता के साथ ठोस कदम उठाने चाहिए।
कार्यक्रम में कहा गया कि शिक्षा, रोजगार और समान अवसर केवल नीतिगत विषय नहीं हैं, बल्कि संविधान में निहित समानता, न्याय और गरिमा के मूल्यों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न हैं। छात्र-युवाओं की आवाज को गंभीरता से सुनते हुए शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और समान अवसर सुनिश्चित किए जाने चाहिए।
एसएफआई ने अपनी सात सूत्रीय मांगों को दोहराते हुए आरटीई प्रवेश प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता, सरकारी विद्यालयों को मजबूत बनाने, प्रत्येक जिले में महिला परीक्षा केंद्र स्थापित करने, विद्यार्थियों को मेट्रो और इलेक्ट्रिक बसों में 50 प्रतिशत किराया रियायत देने, प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई, प्रभावित छात्रों को न्याय दिलाने तथा परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग की।
समापन अवसर पर संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि यह आंदोलन किसी एक दिन तक सीमित नहीं है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, छात्र अधिकारों और सम्मानजनक रोजगार के लिए चल रहे लोकतांत्रिक संघर्ष का हिस्सा है। यदि इन मुद्दों पर प्रभावी पहल नहीं की गई तो संगठन आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखेगा।
कार्यक्रम में महबूब आलम, मोहम्मद अल्ताफ, आराध्य बाजपेयी, वैष्णवी सक्सेना, मरियम जमील, अश्वनी मिश्रा, आदर्श कुमार, जुनैद मंसूरी, हसन अहमद और मोहम्मद अदनान सहित बड़ी संख्या में छात्र-युवा उपस्थित रहे।
अंत में एसएफआई कानपुर जिला कमेटी ने आंदोलन को समर्थन देने वाले छात्र-युवाओं, शिक्षकों, जनसंगठनों, मीडिया प्रतिनिधियों और नागरिकों का आभार व्यक्त करते हुए शिक्षा और छात्र अधिकारों की लड़ाई को आगे भी जारी रखने का संकल्प दोहराया।
एसएफआई का 24 घंटे का अनशन समाप्त, छात्र रियायत और रोजगार समेत सात मांगें दोहराईं