1115 करोड़ की योजना से बदलेगी शहर की यातायात व्यवस्था, ट्रेनों के डायवर्जन की तैयारी
कानपुर। अनवरगंज से मंधना तक प्रस्तावित एलिवेटेड रेलवे ट्रैक परियोजना अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। पूर्वोत्तर रेलवे ने निर्माण कार्य के लिए रेलवे बोर्ड से दो वर्ष का ब्लॉक मांगा है। अनुमति मिलते ही पुराने ट्रैक को हटाकर एलिवेटेड डबल ट्रैक निर्माण शुरू कर दिया जाएगा। इसके चलते आने वाले समय में इस रूट पर ट्रेनों के संचालन पर असर पड़ने की संभावना है।
करीब 1115 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय से 50 प्रतिशत बजट जारी किया जा चुका है। निर्माण कार्य राजस्थान की कंपनी रवि इंफाबिल्ड प्रोजेक्ट्स लिमिटेड (आरआईपीएल) को सौंपा गया है। कंपनी ने पुराने ट्रैक और आसपास के क्षेत्र का टोपोग्राफिकल सर्वे शुरू कर दिया है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार 15.52 किलोमीटर लंबे और 17 मीटर चौड़े एलिवेटेड डबल ट्रैक पर छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय के सामने अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त ‘अटल स्टेशन’ बनाया जाएगा। यह स्टेशन सीधे मेट्रो नेटवर्क से जुड़ा रहेगा।
रेलवे प्रशासन अगले कुछ दिनों में जमीन का सीमांकन पूरा कर निर्माण प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है। रेलवे बोर्ड से ब्लॉक मिलने के बाद पहले पुराने ट्रैक हटाए जाएंगे, जिसमें करीब एक माह का समय लगेगा। इसके बाद पिलर और एलिवेटेड संरचना का निर्माण तेजी से शुरू होगा।
वर्तमान में इस रेलखंड से राजस्थान, मुंबई समेत कई प्रमुख शहरों के लिए 40 से अधिक एक्सप्रेस, सुपरफास्ट और पैसेंजर ट्रेनें गुजरती हैं। इसके अलावा मालगाड़ियों का भी संचालन इसी मार्ग से होता है। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक निर्माण अवधि में कई ट्रेनों को डायवर्ट किया जा सकता है, जबकि कुछ ट्रेनों को अस्थायी रूप से निरस्त भी किया जा सकता है।
रेलवे प्रशासन का कहना है कि परियोजना पूरी होने के बाद शहर की 14 रेलवे क्रॉसिंग पर लगने वाले जाम से लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। एलिवेटेड ट्रैक बनने से सड़क यातायात सुगम होगा और समय व ईंधन दोनों की बचत होगी।