कानपुर। विद्युत विभाग में कार्यरत महिला चपरासी राधा पिछले तीन वर्षों से अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं, लेकिन आज तक उन्हें सुरक्षित सरकारी आवास नहीं मिल सका। हालत यह है कि जिस आवास में वह वर्तमान में रह रही हैं, उसे विभाग ने जर्जर घोषित कर खाली करने का नोटिस तक चस्पा कर दिया है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी उनकी सुनवाई नहीं कर रहे हैं।राधा, जो विद्युत परीक्षण खण्ड कानपुर में चपरासी पद पर कार्यरत हैं, वर्तमान में विद्युत कॉलोनी के आवास संख्या 1/10 में निवास कर रही हैं। विभागीय नोटिस के अनुसार भवन खतरनाक स्थिति में है और इसे खाली कराया जाना है।पीड़िता का आरोप है कि वह पिछले तीन वर्षों से लगातार नया आवास आवंटित कराने के लिए अधिकारियों को प्रार्थना पत्र दे रही हैं। अधिशासी अभियंता विद्युत जानपद खण्ड (वितरण) कानपुर समेत कई अधिकारियों को कई बार आवेदन दिए गए, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला।राधा के अनुसार आवास संख्या 2/10 दिनांक 31 दिसंबर 2025 से खाली पड़ा है। उन्होंने इसके खाली होने से पहले ही 7 मई 2025 को आवेदन भी कर दिया था। सबसे अहम बात यह है कि आवास आवंटन की पात्रता सूची में उनका नाम प्रथम स्थान पर बताया जा रहा है, फिर भी उन्हें आवास नहीं दिया जा रहा। अब इस पूरे मामले को लेकर विभागीय कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। आखिर आवास संख्या 2/10 में ऐसा क्या है कि पात्र महिला कर्मचारी को वह कॉलोनी आवंटित नहीं की जा रही। सूत्रों के अनुसार विभाग के अंदरखाने में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। यहां तक सवाल उठ रहे हैं कि क्या किसी अधिकारी ने उक्त आवास को लेकर किसी से कोई लेन-देन तो नहीं कर लिया है? अगर ऐसा नहीं है तो फिर आखिर वह कौन-सी वजह है जिसके चलते नियमों में प्रथम पात्रता रखने वाली महिला कर्मचारी को आज तक आवास से वंचित रखा गया है। जर्जर मकान खाली करने का दबाव एक तरफ और दूसरी तरफ वैकल्पिक आवास न मिलने से महिला कर्मचारी मानसिक तनाव से गुजर रही है। अब देखना होगा कि विभाग इस मामले में पारदर्शिता दिखाता है या फिर सवालों के घेरे और गहरे होते जाएंगे।
आखिर 2/10 आवास में ऐसा क्या? पात्र महिला कर्मी को क्यों रखा जा रहा इंतजार में