इंसाफ के लिए सड़क पर उतरे फौजी और खिलाड़ी
मनीष गुप्ता
कानपुर। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक नगर कानपुर से चिकित्सा व्यवस्था को पूरी तरह शर्मसार करने वाले दो ऐसे रोंगटे खड़े कर देने वाले मामले सामने आए हैं, जिन्होंने पूरे प्रशासनिक और चिकित्सा जगत में हड़कंप मचा दिया है। शहर के निजी अस्पतालों में इलाज के नाम पर हो रही कथित लापरवाही, तीमारदारों से मोटी रकम की उगाही, और स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की रहस्यमयी चुप्पी ने पूरे सिस्टम पर बेहद गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। सबसे ज्यादा विचलित करने वाली बात यह है कि इस ‘मेडिकल माफिया तंत्र’ के खिलाफ आवाज उठाने वाले कोई आम इंसान नहीं, बल्कि देश की सीमाओं पर तैनात ITBP का एक जांबाज जवान और खेल के मैदान पर देश का गौरव बढ़ाने वाले अंतरराष्ट्रीय मिस्ट्री स्पिनर खिलाड़ी हैं। अपनी माताओं के साथ हुई क्रूरता और लापरवाही के खिलाफ अब इन दोनों बेटों ने इंसाफ के लिए आर-पार की जंग छेड़ दी है।
मामला 1 मां का कटा हुआ हाथ लेकर सीधे पुलिस कमिश्नरेट दफ्तर पहुंचा ITBP का जवान
टाटमिल के ‘कृष्णा हॉस्पिटल’ पर संवेदनहीनता और अंगभंग करने का संगीन आरोप, वेंटिलेटर पर जिंदगी की जंग लड़ रही मां कानपुर-महानगर के टाटमिल चौराहे के पास स्थित ‘कृष्णा हॉस्पिटल’ में डॉक्टरों की एक ऐसी कथित क्रूरता सामने आई है, जिसे सुनकर किसी का भी दिल दहल जाए। महाराजपुर थाना क्षेत्र के रहने वाले और ITBP (भारत-तिब्बत सीमा पुलिस) में सिपाही के पद पर तैनात विकास ने पुलिस के आला अधिकारियों से लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए न्याय की गुहार लगाई है। बिना सहमति के काट दिया हाथ विकास ने जवान बताया कि उनकी
मां को सांस लेने में दिक्कत थी कृष्णा हॉस्पिटल ने वेंटिलेटर में रखा और वहां उनको फायदा हुआ लेकिन उसी बीच गलत इंजेक्शन दे दिया गया जिससे जवान की मां का हाथ संक्रमित हो गया काला पड़ गया फिर वो पारस हॉस्पिटल गया वहां बहुत प्रयास के बाद भी संक्रमण नहीं रोक पाए तब मजबूरी में पारस हॉस्पिटल ने जवान से पूछा हाथ को काट दिया , कृष्णा हॉस्पिटल में काम कर रहे अज्ञानी झोलाछाप डॉक्टर और उनकी लापरवाही का नजीता था गंभीर आरोप है कि अस्पताल में उपचार के दौरान डॉक्टरों और स्टाफ ने घोर लापरवाही बरती। हद तो तब हो गई जब परिजनों को बिना किसी ठोस वजह, बिना उचित जानकारी दिए और बिना किसी लिखित सहमति के महिला का हाथ काट दिया गया। अस्पताल प्रबंधन की इस खौफनाक मनमानी के बाद महिला की हालत और ज्यादा बिगड़ गई। स्थिति नाजुक होने पर डॉक्टरों ने पल्ला झाड़ लिया, जिसके बाद आनन-फानन में उन्हें वहां से निकालकर दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इस समय वह वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत के बीच बेहद गंभीर स्थिति में जंग लड़ रही हैं। दफ्तर में मच गया हड़कंप, पुलिस ने दिए फोरेंसिक जांच के आदेश अस्पताल प्रबंधन की इस क्रूरता और संवेदनहीनता से आक्रोशित सिपाही विकास अपनी मां के कटे हुए हाथ को एक पोटली में साथ लेकर सीधे पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गए। पीड़ित जवान को इस स्थिति में देख दफ्तर में मौजूद तमाम अधिकारी और कर्मचारी स्तब्ध रह गए। जवान ने उच्चाधिकारियों के सामने अपनी मां का कटा हुआ हाथ रखकर रोते हुए डॉक्टरों की इस बर्बरता की पूरी कहानी बयां की और आरोपित डॉक्टरों के खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी की मांग की। मामला सीधे तौर पर चिकित्सा लापरवाही और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा होने के कारण पुलिस महकमे ने इसे अत्यंत गंभीरता से लिया है। शिकायत मिलते ही उच्चाधिकारियों ने मामले की तत्काल और निष्पक्ष जांच के आदेश दे दिए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पीड़ित महिला के कटे हुए हाथ को कब्जे में लेकर फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हाथ किस परिस्थिति में और क्यों काटा गया। इस पूरे मामले की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से एक विशेष मेडिकल बोर्ड का गठन भी किया जा रहा है। जांच रिपोर्ट सामने आते ही अस्पताल प्रबंधन और संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ आईपीसी/बीएनएस की सुसंगत धाराओं में बेहद कड़ी वैधानिक व दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। अधिकारियों ने साफ कहा है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
मामला 2
आचार्य नगर निवासी उत्कर्ष द्विवेदी
अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी उत्कर्ष द्विवेदी का आरोप “इलाज के नाम पर वसूली, विरोध करने पर ठोक दिया फर्जी मुकदमा। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय पर भी लगा अस्पताल प्रबंधन से मिलीभगत और अभद्र व्यवहार का आरोप निजी अस्पतालों की मनमानी के खिलाफ दूसरी बड़ी आवाज उठाई है शिवकटरा (रामादेवी) निवासी अंतरराष्ट्रीय स्तर के मिस्ट्री स्पिनर खिलाड़ी उत्कर्ष द्विवेदी ने। उन्होंने कैलाश मेडिकल सेंटर और स्वास्थ्य विभाग के कुछ उच्च अधिकारियों पर मिलीभगत, इलाज में लापरवाही और शिकायतों की अनदेखी जैसे बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
एक प्रेसवार्ता के दौरान भावुक और आक्रोशित उत्कर्ष द्विवेदी ने बताया कि उन्होंने अपनी मां को 21 जुलाई 2025 को शहर के एक रसूखदार कैलाश मेडिकल सेंटर में भर्ती कराया था। उनका आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने इलाज के नाम पर उनके परिवार से भारी-भरकम रकम वसूली, लेकिन जब उपचार की बात आई तो अपेक्षित सावधानी, जिम्मेदारी और डॉक्टरों के प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया। उन्होंने दावा किया कि डॉक्टरों की इसी घोर लापरवाही के चलते आखिरकार उनकी मां की मौत हो गई। सच बोलने की मिली सजा, खिलाड़ी को ही बना दिया उत्कर्ष का कहना है कि जब उन्होंने अपनी मां की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ आवाज उठाई और वहां चल रही कथित अनियमितताओं का पुरजोर विरोध किया, तो अस्पताल संचालक ने उल्टा उन्हें ही निशाना बनाना शुरू कर दिया। आरोप है कि अस्पताल संचालक ने अपने राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए खिलाड़ी उत्कर्ष के खिलाफ ही रंगदारी मांगने का एक फर्जी मुकदमा दर्ज करा दिया। उत्कर्ष ने प्रेस के सामने अपना दर्द बयां करते हुए कहा यह सिर्फ एक व्यक्ति की आवाज को दबाने की कोशिश नहीं है, बल्कि कानपुर शहर में चिकित्सा तंत्र के खिलाफ सच बोलने वाले हर नागरिक को भयभीत और चुप करने की एक सोची-समझी साजिश है। इस पूरे मामले में मुझे मानसिक, सामाजिक और कानूनी रूप से बुरी तरह प्रताड़ित करने का प्रयास किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की भूमिका संदिग्ध, वायरल ऑडियो की जांच की मांग
अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी ने कानपुर के स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर भी तीखे बाण चलाए। उनका कहना है कि जब वह अपनी शिकायत लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय पहुंचे, तब वहां भी उन्हें कोई न्याय या निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिली।उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारियों ने उनकी मां की मौत की शिकायत को गंभीरता से लेने के बजाय उनके साथ असम्मानजनक और अभद्र व्यवहार किया और अप्रत्यक्ष रूप से पर्दे के पीछे से अस्पताल प्रबंधन का पक्ष लिया। प्रेसवार्ता में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक कथित वसूली ऑडियो का मुद्दा भी गरमाया रहा। उत्कर्ष ने प्रशासनिक अधिकारियों पर सवाल दागते हुए कहा कि यदि उक्त ऑडियो फर्जी है, तो उसकी फॉरेंसिक जांच अब तक क्यों नहीं कराई गई। पूरे मामले की निष्पक्षता तभी सामने आएगी जब तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर पारदर्शी जांच होगी।उत्कर्ष द्विवेदी ने शासन-प्रशासन से निम्नलिखित मांगें की हैं।
1. वायरल ऑडियो की तत्काल फॉरेंसिक जांच कराई जाए।
2. इस मामले में संलिप्त स्वास्थ्य विभाग के संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच हो।
3. शहर में संचालित सभी निजी नर्सिंग होम और अस्पतालों की एक स्वतंत्र कमेटी बनाकर जांच कराई जाए।
4. मानकों के विपरीत और अवैध रूप से संचालित संस्थानों को तत्काल सील कर सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी कि यदि जल्द ही इस मामले में न्यायसंगत कार्रवाई नहीं हुई, तो वह इस गंभीर मुद्दे को लेकर सड़कों पर उतरेंगे और एक बड़ा सार्वजनिक आंदोलन करेंगे। साथ ही उन्होंने मीडिया के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री से भी इस पूरे सिंडिकेट को ध्वस्त करने के लिए हस्तक्षेप की भावुक अपील की है।
खिलाड़ी का तीखा बयान “भगवान भरोसे कानपुर की जनता”
प्रेसवार्ता के दौरान अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी उत्कर्ष द्विवेदी ने कानपुर के चिकित्सा ढांचे की कड़वी सच्चाई को बयां करते हुए कहा
शहर में बिना किसी मानक, बिना योग्य डॉक्टरों और बिना वैध रजिस्ट्रेशन के धड़ल्ले से सैकड़ों नर्सिंग होम और अस्पताल फल-फूल रहे हैं। जब कोई बड़ी घटना होती है, तो स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कार्रवाई के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति की जा रही है। इस ढुलमुल रवैये के कारण हर दिन न जाने कितने आम मरीजों की जान सीधे तौर पर दांव पर लगी हुई है।” मुख्य मांगें और निष्कर्ष: क्या मिलेगा इन दोनों बेटों को इंसाफ।
इन दोनों झकझोर देने वाले मामलों के सामने आने के बाद कानपुर की जनता में भारी आक्रोश है। एक तरफ देश की सीमा पर तैनात फौजी अपनी मां का कटा हुआ हाथ लेकर दफ्तरों के चक्कर काट रहा है, तो दूसरी तरफ देश का नाम रोशन करने वाला अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी खुद पर लगे फर्जी मुकदमों और मां की मौत के गम से टूट रहा है। अब देखना यह होगा कि क्या उत्तर प्रदेश सरकार और कानपुर का जिला प्रशासन इन ‘सफेदपोश’ गुनहगारों और उनके मददगार अफसरों पर कोई कड़ी कार्रवाई करता है, या फिर यह मामले भी फाइलों में दबकर रह जाएंगे। पीड़ितों ने साफ कर दिया है कि जब तक दोषियों को जेल नहीं भेजा जाता, उनकी यह कानूनी और सामाजिक लड़ाई जारी रहेगी।
उपरोक्त आरोप पीड़ित पक्षों द्वारा लगाए गए हैं। संबंधित अस्पताल प्रबंधन एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से खबर लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी थी। मामले की जांच संबंधित प्रशासनिक व स्वास्थ्य विभागीय स्तर पर जारी है, सत्यता का अंतिम निर्धारण जांच रिपोर्ट एवं न्यायालयीन प्रक्रिया के आधार पर होगा।