रामा देवी क्षेत्र के नर्सिंग होम, अवैध ओपीडी और अस्पतालों पर गंभीर आरोप, क्रिकेटर उत्कर्ष द्विवेदी ने मांगी इंसाफ की गुहार
कानपुर। शहर के रामा देवी शिवकटरा क्षेत्र में संचालित निजी नर्सिंग होम, अस्पतालों और कथित अवैध ओपीडी के खिलाफ एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। खुद को पीड़ित बताने वाले क्रिकेटर उत्कर्ष द्विवेदी ने आरोप लगाया है कि उनकी मां की इलाज के नाम पर लापरवाही और भारी वसूली के चलते मौत हो गई, लेकिन आज तक परिवार को न तो पूरी मेडिकल रिपोर्ट दी गई और न ही इलाज से जुड़े जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराए गए।
उत्कर्ष द्विवेदी का आरोप है कि “कैलाश मेडिकल सेंटर, शिवकटरा” में उनकी मां का इलाज किया गया, जहां ICU, वेंटिलेटर और अन्य सुविधाओं के नाम पर लगभग 70 हजार रुपये तक की वसूली की गई। इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन ने डिस्चार्ज सारांश, बिल और मेडिकल रिपोर्ट तक देने से इनकार कर दिया। पीड़ित परिवार पिछले आठ महीनों से लगातार दस्तावेज मांग रहा है, लेकिन उन्हें हर बार अलग-अलग बहाने बनाकर टाल दिया गया। पीड़ित ने बताया कि पहले उन्होंने स्वयं अपने नाम से रिकॉर्ड मांगे तो कहा गया कि छोटे भाई के हस्ताक्षर हैं। बाद में छोटे भाई के नाम से आवेदन देने के बावजूद अस्पताल प्रशासन ने कोई जवाब नहीं दिया। इतना ही नहीं, मामले की शिकायत कानपुर के सीएमओ और नोडल अधिकारियों तक पहुंची, लेकिन वहां से भी कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई।उत्कर्ष द्विवेदी ने दावा किया कि संबंधित व्यक्ति जितेन्द्र शर्मा के पास एलोपैथिक चिकित्सा से जुड़ी कोई मान्य डिग्री नहीं होने की बात खुद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा कही जा चुकी है, फिर भी उसके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं हो रही। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किसके संरक्षण में ऐसे अस्पताल और कथित अवैध चिकित्सा केंद्र खुलेआम संचालित हो रहे हैं। पीड़ित परिवार का आरोप है कि जब उन्होंने पूरे मामले की पैरवी शुरू की और आवाज उठाई, तो उन पर दबाव बनाने के लिए झूठे मुकदमे तक दर्ज करा दिए गए। इसके बावजूद उन्होंने न्याय की लड़ाई जारी रखने की बात कही है। उत्कर्ष द्विवेदी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath से सीधे हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि “जीरो टॉलरेंस और भ्रष्टाचार मुक्त शासन के दावों के बीच इस तरह के अस्पताल सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहे हैं। अगर एक परिवार अपनी मां के इलाज से जुड़े कागजात तक हासिल नहीं कर पा रहा, तो आम जनता का क्या होगा। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ऐसे अस्पतालों और कथित अवैध मेडिकल सिंडिकेट पर कार्रवाई कब होगी और पीड़ित परिवार को न्याय तथा उनकी मां से जुड़े सभी मेडिकल दस्तावेज कब मिलेंगे।