Non MBBS बताये जा रहे डॉक्टर पर गंभीर आरोप, कार्रवाई न होने से भड़का मृतक का बेटा; स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल संचालकों की मिलीभगत के गंभीर आरोप
कानपुर। रामा देवी स्थित शिव कटरा स्थित एक निजी मेडिकल सेंटर को लेकर एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक युवक ने अपनी मां की मौत के लिए खुद को डॉक्टर बताने वाले व्यक्ति पर सीधे तौर पर हत्या जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। मृतका के पुत्र खिलाड़ी उत्कर्ष ने पुलिस आयुक्त से लेकर स्वास्थ्य विभाग और कई उच्च अधिकारियों तक गुहार लगाई, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई न होने से पीड़ित परिवार में भारी आक्रोश है। पीड़ित पुत्र उत्कर्ष का आरोप है कि वह 21 जुलाई 2025 की रात करीब 10:15 बजे अपनी मां को केवल खून की कमी होने के कारण इलाज और ब्लड चढ़वाने के लिए कैलाश मेडिकल सेंटर, शिव कटरा, रामा देवी लेकर गया था। उसका कहना है कि अस्पताल पहुंचते ही उसकी मां को सीधे ICU में भर्ती करने की तैयारी शुरू कर दी गई। जब उसने इसका विरोध किया तो अस्पताल संचालक और खुद को डॉक्टर बताने वाले जितेंद्र शर्मा ने कथित तौर पर कहा, “डॉक्टर मैं हूं या तुम पीड़ित का आरोप है कि उसकी मां की हालत गंभीर नहीं थी और प्रारंभिक रिपोर्ट तथा एक्स-रे सामान्य थे, इसके बावजूद जबरन गंभीर बीमारी बताकर इलाज शुरू किया गया। उत्कर्ष के अनुसार अस्पताल संचालक ने फोन पर खुद ही ब्लड की व्यवस्था कराई और महज छह घंटे के भीतर दूसरी यूनिट ब्लड चढ़ा दी गई, जिसके बाद उसकी मां की हालत अचानक बिगड़ गई। अगले दिन 22 जुलाई 2025 की दोपहर करीब 2:30 बजे उसकी मौत हो गई। मृतक के पुत्र का कहना है कि मां की मौत के बाद उसे पूरे मामले में गहरी साजिश और लापरवाही का संदेह हुआ। उसने IGRS पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई और बाद में मेडिकल काउंसिल तथा अन्य संस्थाओं से जानकारी जुटाई। पीड़ित का दावा है कि उसे प्राप्त दस्तावेजों में कथित डॉक्टर जितेंद्र शर्मा का नाम किसी मान्यता प्राप्त MBBS रजिस्ट्रेशन सूची में नहीं मिला। इसी आधार पर उसने आरोप लगाया कि बिना मेडिकल डिग्री के वर्षों से अस्पताल, ICU, मेडिकल स्टोर और लैब संचालित की जा रही है और ग्रामीण व गरीब मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ हो रहा है। उत्कर्ष ने आरोप लगाया कि शिकायतों के बावजूद अब तक केवल खानापूर्ति की गई। उसका कहना है कि कुछ समय पहले स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल में छापा जरूर मारा, लेकिन केवल ICU सील कर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया, जबकि अस्पताल की अन्य गतिविधियां आज भी जारी हैं। पीड़ित परिवार सवाल उठा रहा है कि यदि संचालक के पास कोई वैध मेडिकल डिग्री नहीं है तो आखिर इतने वर्षों से इतना बड़ा अस्पताल कैसे संचालित हो रहा था। पीड़ित ने स्वास्थ्य विभाग पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उसका कहना है कि संबंधित व्यक्ति का निजी क्लीनिक काशीराम अस्पताल के सामने खुलेआम संचालित हो रहा है और वहां कथित तौर पर निजी सुरक्षा कर्मी भी तैनात रहते हैं। परिवार का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत के कारण ही अब तक कठोर कार्रवाई नहीं हो सकी है। मृतका के बेटे उत्कर्ष का कहना है कि वह पिछले कई महीनों से छोटे-बड़े अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रहा है, लेकिन उसे न्याय नहीं मिल पा रहा। उसने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर कथित फर्जी डॉक्टर और अस्पताल संचालकों के खिलाफ हत्या, धोखाधड़ी और अवैध चिकित्सकीय संचालन जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को इस तरह अपनों को न खोना पड़े।