11 मई से काली पट्टी बांधकर करेंगे विरोध, मांगें न मानी गईं तो कार्य बहिष्कार की चेतावनी
कानपुर। नगर निगम में निजीकरण और आउटसोर्सिंग व्यवस्था में बदलाव के विरोध में कर्मचारियों ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है। संयुक्त कर्मचारी संघर्ष समिति की ओर से शुक्रवार को जोन-5 गोविंद नगर स्थित जोनल कार्यालय में सैकड़ों कर्मचारियों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें निगम प्रशासन की नीतियों के खिलाफ तीखा विरोध जताते हुए आंदोलन की रणनीति तय की गई।
बैठक में कर्मचारी नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई तो आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन किया जाएगा, जिसका असर नगर निगम की व्यवस्थाओं पर पड़ सकता है। संघर्ष समिति ने चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा करते हुए बताया कि 11 से 13 मई तक सभी कर्मचारी हाथों में काली पट्टी बांधकर काम करेंगे और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराएंगे। इसके बाद 14 मई को दोपहर 12 बजे मोतीझील स्थित नगर निगम मुख्यालय पर विशाल आमसभा आयोजित की जाएगी।
कर्मचारी नेताओं का कहना है कि यदि प्रशासन के साथ वार्ता सफल नहीं होती है तो इसी आमसभा में कार्य बहिष्कार जैसे बड़े आंदोलन का ऐलान किया जा सकता है। कर्मचारियों के कड़े रुख को देखते हुए आने वाले दिनों में शहर की सफाई व्यवस्था और अन्य प्रशासनिक कार्य प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
बैठक में संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि नगर आयुक्त द्वारा सेवा प्रदाता कंपनियों के माध्यम से ई-टेंडर प्रक्रिया लागू करने की तैयारी की जा रही है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि यह व्यवस्था लागू हुई तो आउटसोर्स कर्मचारियों को उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम बोर्ड के तहत मिलने वाले कई महत्वपूर्ण लाभों से वंचित होना पड़ेगा।
कर्मचारियों ने मांग की कि टेंडर प्रक्रिया ‘जी-पोर्टल’ के माध्यम से कराई जाए और जो भी कंपनी कार्य का जिम्मा संभाले, वह कर्मचारियों के वेतन वृद्धि, ईपीएफ, ईएसआई और सेवा सुरक्षा की गारंटी सुनिश्चित करे। कर्मचारियों का आरोप है कि वर्तमान व्यवस्था में आउटसोर्स कर्मचारियों का लगातार शोषण हो रहा है और आए दिन उन्हें सेवा से बाहर किया जा रहा है।
कर्मचारी नेता रमाकांत मिश्रा ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि कर्मचारी जनहित में आंदोलन नहीं करना चाहते, लेकिन प्रशासन लगातार उनकी समस्याओं को नजरअंदाज कर रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रदेश के अन्य नगर निगमों में सेवा प्रदाता कंपनियों के माध्यम से कार्य नहीं कराया जा रहा, तो कानपुर में इस व्यवस्था को लागू करने की कोशिश क्यों की जा रही है।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में जनप्रतिनिधियों को भी ज्ञापन सौंपा गया है और उनसे हस्तक्षेप की मांग की गई है, ताकि कर्मचारियों के हितों की रक्षा हो सके।
बैठक में जयपाल सिंह, रमाकांत मिश्रा, हरिओम वाल्मीकि, विनोद रावत, अजीत बाघमार, मुकेश वाल्मीकि, नीलू निगम, उस्मान अली शाह, मुन्ना हजारिया, मनीलाल भारती, धीरज गुप्ता, कमरुद्दीन, अखिलेश सिंह, रामगोपाल चौधरी, नरेश, नरेंद्र खन्ना और कृष्णा बालक सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी उपस्थित रहे।
फिलहाल नगर निगम प्रशासन की ओर से इस पूरे मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन कर्मचारियों की नाराजगी और आंदोलन की चेतावनी ने नगर निगम प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।