कानपुर—देश में तेजी से बढ़ती लीवर संबंधी बीमारियों को लेकर रीजेंसी हेल्थ, कानपुर ने आम लोगों को सतर्क किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि लीवर की बीमारियां शुरुआती चरण में बिना लक्षण के विकसित होती हैं, जिससे समय पर पहचान मुश्किल हो जाती है। यही कारण है कि इन्हें “साइलेंट किलर” कहा जाता है।
रीजेंसी हेल्थ के सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी डायरेक्टर डॉ. अभिमन्यु कपूर के अनुसार, जब तक पीलिया, पेट में सूजन या अन्य स्पष्ट लक्षण दिखाई देते हैं, तब तक लीवर को काफी नुकसान हो चुका होता है। आंकड़ों के मुताबिक, भारत में हर 100 में से लगभग 3 मौतें लीवर से जुड़ी बीमारियों के कारण होती हैं, जो इसे देश में मृत्यु का आठवां सबसे बड़ा कारण बनाती हैं।
विशेषज्ञों ने बताया कि हर तीन में से एक भारतीय ‘नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर’ से प्रभावित हो सकता है। चिंताजनक बात यह है कि टीनएजर्स में भी मेटाबॉलिक समस्याओं और फैटी लीवर के मामले 30 से 38 प्रतिशत तक पहुंच रहे हैं। मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, शराब का सेवन और असंतुलित खान-पान इसके प्रमुख कारण हैं।
डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि वे लक्षणों का इंतजार न करें, बल्कि नियमित रूप से लीवर फंक्शन टेस्ट और अल्ट्रासाउंड कराएं। साथ ही संतुलित आहार लें, वजन नियंत्रित रखें, शराब से दूरी बनाएं, शुगर और कोलेस्ट्रॉल को संतुलित रखें और हेपेटाइटिस B का टीकाकरण जरूर करवाएं।
डॉ. अभिमन्यु कपूर ने विशेष रूप से डायबिटीज और अधिक वजन वाले लोगों को नियमित जांच कराने की सलाह देते हुए कहा कि शुरुआती पहचान ही लीवर फेलियर जैसी गंभीर स्थिति से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है।
साइलेंट किलर बनती लीवर बीमारियां, समय पर जांच जरूरी