सद्गुणों से ही निखरता है व्यक्तित्व, सज्जनों की संगति मोक्ष का मार्ग: आचार्य अभिषेक

धर्मानुकूल परोपकार पर दिया बल, अनैतिक कार्यों में सहयोग को बताया अधर्म

कानपुर।
स्वरूपनगर स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस पर भक्तिभाव और आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष वातावरण देखने को मिला। कथा व्यास आचार्य अभिषेक शुक्ल ने अपने प्रवचनों के माध्यम से जीवन में सद्गुणों को अपनाने, उत्तम आचरण विकसित करने और सज्जनों की संगति के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक बुद्धिमान व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह अपनी संतानों को बचपन से ही सद्गुणों, सद्व्यवहार और उत्कृष्ट आचरणों से संस्कारित करे। शीलसम्पन्न और नीतिज्ञ व्यक्ति ही समाज में सर्वत्र सम्मान पाता है। उत्तम चरित्र ही मानव को महान बनाता है और उसके व्यक्तित्व को समाज में विशिष्ट पहचान दिलाता है।
आचार्य अभिषेक ने परोपकार की व्याख्या करते हुए कहा कि परहित का अर्थ केवल सहायता करना नहीं, बल्कि धर्मानुकूल सहायता करना है। यदि किसी व्यक्ति के अनुचित या अनैतिक कार्य में सहयोग किया जाए तो वह परोपकार नहीं, बल्कि अधर्म होता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि परीक्षा में नकल कराना या उसमें सहयोग करना किसी का हित नहीं, बल्कि उसके भविष्य के साथ अन्याय है।
कथा के दौरान कपिल-देवहूति संवाद का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि सत्पुरुषों की संगति ही मोक्ष का द्वार है। सज्जनों के गुणों का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि दूसरों के गुणों में अनुराग रखना, गुरुजनों के प्रति विनम्र रहना, विद्या में रुचि रखना, लोक निंदा का भय रखना, भगवान में भक्ति करना और दुर्जनों की संगति का त्याग करना जीवन को श्रेष्ठ बनाता है।
उन्होंने आगे कहा कि विपत्ति में धैर्य रखना, उन्नति के समय क्षमाशील बने रहना, यश प्राप्ति की इच्छा रखना, अतिथि सत्कार करना और उपकार कर मौन रहना सज्जनों के स्वाभाविक लक्षण हैं। साथ ही, स्वयं पर हुए उपकार को सार्वजनिक करना, धन का अहंकार न करना और दूसरों के गुणों की प्रशंसा करना भी एक श्रेष्ठ व्यक्ति के गुण हैं।
आचार्य ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे इन सद्गुणों को अपने जीवन में आचारित करने का प्रयास करें, जिससे न केवल उनका व्यक्तिगत जीवन बेहतर होगा बल्कि समाज में भी सकारात्मक परिवर्तन आएगा।
इस अवसर पर मंदिर प्रबंधक एवं ज्योतिषाचार्य नरेन्द्र शास्त्री, अजित श्रीवास्तव, सुषमा द्विवेदी, ममता श्रीवास्तव, दीपा निगम, गीता निगम सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा के अंत में भजन-कीर्तन और आरती के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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