कानपुर। फूलबाग फलमंडी की ढाल पर हुए भीषण अग्निकांड के पीड़ितों का सब्र अब जवाब दे चुका है। चार-चार बार धरना देने के बावजूद जब न कोई नेता सामने आया और न ही किसी अधिकारी ने सुध ली, तो 29 पीड़ित परिवारों ने अब सत्याग्रह का बिगुल फूंक दिया है।
उत्तर प्रदेश व्यापार मंडल के बैनर तले आयोजित सभा में पीड़ितों ने एकजुट होकर ऐलान किया कि “अब यह लड़ाई आर-पार की होगी।” बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर उनके चित्र के समक्ष शपथ लेते हुए सभी ने संकल्प लिया कि जब तक न्याय और मुआवजा नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
कार्यक्रम की शुरुआत सुरेंद्र सविता द्वारा दीप प्रज्वलन से हुई, जबकि इमराना खान ने पीड़ितों और उपस्थित लोगों को संघर्ष की शपथ दिलाई। संचालन रामशंकर वर्मा ने किया।
सभा में उत्तर प्रदेश व्यापार मंडल के मंडल अध्यक्ष सिद्धार्थ काशीवार ने प्रशासन और बिजली विभाग पर तीखा प्रहार करते हुए कहा—
“यह कोई हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही का नतीजा है। 29 परिवार बर्बाद हो गए, लेकिन जिम्मेदारों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। चार बार धरना देने के बाद भी अगर सरकार नहीं जागी, तो यह बेहद शर्मनाक है।”
उन्होंने कहा कि जर्जर बिजली तारों और विभागीय अनदेखी के चलते लोगों की जिंदगी भर की कमाई राख हो गई और आज वे सड़क पर आ गए हैं।
पीड़ितों की प्रमुख मांगें:
29 परिवारों को तत्काल 2,75,000 रुपये का मुआवजा
बेघर परिवारों का उसी स्थान पर पुनर्वास
दोषी बिजली अधिकारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई
सभा के दौरान पीड़ितों का दर्द साफ झलकता नजर आया। कई परिवारों ने कहा कि “हमारी जिंदगी उजड़ गई, लेकिन सरकार के लिए हम सिर्फ आंकड़े बनकर रह गए हैं।”
सिद्धार्थ काशीवार ने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो यह आंदोलन उग्र सत्याग्रह में बदल जाएगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
इस मौके पर आनंदी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजय जायसवाल आनंदी, पवन यादव, राजेंद्र राज, संतोष लोधी, मनीष गौतम, अजय कनौजिया, दिनेश पांडे सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। वहीं अजय प्रकाश तिवारी, उर्मिला दिवाकर, मनोज गुप्ता, दिनेश महाराज, कृष्ण मोहन शुक्ला, दिलीप सिंह, राखी विज समेत कई पदाधिकारी और क्षेत्रीय नागरिक भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में सभी पीड़ितों ने बाबा साहेब के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर संकल्प लिया कि वे अपने अधिकारों की लड़ाई सड़क से लेकर शासन तक लड़ेंगे।
अब सबसे बड़ा सवाल—चार बार धरना देने के बाद भी जब प्रशासन नहीं जागा, तो क्या सत्याग्रह ही आखिरी रास्ता है?