केडीए की बड़ी कार्रवाई: शुक्लागंज-उन्नाव में अवैध निर्माण पर चला बुलडोजर मोड

कानपुर/शुक्लागंज — कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) ने अवैध और अनाधिकृत निर्माणों के खिलाफ अपने अभियान को तेज करते हुए सोमवार को शुक्लागंज-उन्नाव क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। उपाध्यक्ष मदन सिंह गर्ब्याल एवं सचिव अभय कुमार पाण्डेय के निर्देश पर प्रवर्तन (जोन-1बी) की टीम ने सख्त रुख अपनाते हुए बिना स्वीकृत मानचित्र के की जा रही अवैध प्लाटिंग और निर्माणों पर शिकंजा कस दिया। विशेष कार्याधिकारी व उपजिलाधिकारी डॉ. रवि प्रताप सिंह के नेतृत्व में करीब 15,300 वर्ग मीटर क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग व निर्माण को सील किया गया, जबकि लगभग 7,600 वर्ग मीटर क्षेत्र में नोटिस जारी किए गए। कार्रवाई के दौरान ग्राम मुस्कापुर (देवारा कलां) में दीप राजपूत व अन्य द्वारा लगभग 6,000 वर्ग मीटर में की जा रही अवैध प्लाटिंग को सील किया गया, वहीं ग्राम देवारा कलां में गिरिजा शंकर व अन्य द्वारा करीब 9,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में चल रही अवैध प्लाटिंग को तत्काल प्रभाव से बंद कर सीलिंग की जद में लिया गया। इसके अलावा ग्राम पिंडोखा में भूरेलाल व अन्य द्वारा 300 वर्ग मीटर में बिना अनुमति बनाए गए जी+2 निर्माण को भी सील कर दिया गया। इन सभी परिसरों को थाना गंगाघाट (शुक्लागंज) की पुलिस अभिरक्षा में सुपुर्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वहीं उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम-1973 की धारा 27 व 28 के तहत कई मामलों में नोटिस जारी किए गए हैं, जिनमें ग्राम देवारा खुर्द में गौरी शुक्ला व अन्य के 600 वर्ग मीटर में बने जी+2 निर्माण पर कारण बताओ नोटिस, सहजनी क्षेत्र में देशराज चौहान (सिंह प्रॉपर्टी सॉल्यूशन) द्वारा 5,000 वर्ग मीटर में की जा रही अवैध प्लाटिंग पर विकास रोकने का नोटिस तथा ग्राम पिंडोखा में देवी प्रसाद (बांके बिहारी पार्टी लॉन) द्वारा 2,000 वर्ग मीटर में बिना नक्शा पास कराए संचालित गेस्ट हाउस पर धारा-27 के तहत नोटिस जारी किया गया है। डॉ. रवि प्रताप सिंह ने चेतावनी दी है कि यदि नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया तो संबंधित संपत्तियों पर सीलिंग के साथ ध्वस्तीकरण (बुलडोजर) की कार्रवाई भी की जाएगी। इस दौरान अवर अभियंता हिमांशु बर्नवाल, सुपरवाइजर राम औतार, मनोज कुमार सहित भारी पुलिस बल मौजूद रहा। केडीए प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी भूखंड या प्लॉट को खरीदने से पहले उसकी ले-आउट स्वीकृति की जांच अवश्य कर लें तथा बिना स्वीकृत मानचित्र के निर्माण न करें, अन्यथा भविष्य में उन्हें भारी आर्थिक और मानसिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इस सख्त कार्रवाई से स्पष्ट है कि अवैध प्लाटिंग और निर्माण करने वालों के खिलाफ केडीए अब पूरी तरह एक्शन मोड में है और आने वाले समय में इस तरह की कार्रवाई और तेज होने की संभावना है।

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