“चुनौतियों से घबराएं नहीं, उन्हें अवसर बनाएं” — डॉ. साधना यादव का युवाओं को प्रेरक संदेश

दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज में ‘रेज़िलिएंस एंड ग्रोथ माइंडसेट’ पर व्याख्यान, छात्राओं में जागी नई ऊर्जा और आत्मविश्वास

कानपुर स्थित दयानंद गर्ल्स पी.जी. कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग द्वारा छात्राओं के व्यक्तित्व विकास और मानसिक सशक्तिकरण को केंद्र में रखते हुए “रेज़िलिएंस एंड ग्रोथ माइंडसेट: एम्पावरिंग यूथ टू बिल्ड अ ब्राइट फ्यूचर” विषय पर एक प्रेरणादायक व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए मानसिक रूप से मजबूत बनाना और उनमें सकारात्मक सोच का विकास करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर वंदना निगम द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया गया। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि आत्मविश्वास, धैर्य और सकारात्मक दृष्टिकोण ही उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की शक्ति प्रदान करते हैं।
इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में जुहारी देवी गर्ल्स पी.जी. कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर एवं विभाग प्रभारी डॉ. साधना यादव ने अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में आने वाली चुनौतियां हमें परखती हैं और उन्हें दृढ़ता के साथ स्वीकार करना ही सफलता की पहली सीढ़ी है। उन्होंने “रेज़िलिएंस” (लचीलापन) और “ग्रोथ माइंडसेट” (विकासशील सोच) की अवधारणाओं को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाते हुए बताया कि कैसे व्यक्ति अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानकर कठिन परिस्थितियों को भी अवसर में बदल सकता है।
डॉ. साधना यादव ने कहा कि असफलता अंत नहीं बल्कि सीखने का एक महत्वपूर्ण चरण है। यदि हम हर असफलता से कुछ सीखकर आगे बढ़ते हैं, तो सफलता निश्चित रूप से हमारे कदम चूमती है। उन्होंने छात्राओं को अपने लक्ष्य निर्धारित करने, निरंतर प्रयास करने और खुद पर विश्वास बनाए रखने का संदेश दिया। उनके विचारों ने छात्राओं के भीतर नई ऊर्जा, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच का संचार किया।
यह कार्यक्रम आई.क्यू.ए.सी. (IQAC) के अंतर्गत प्रोफेसर सुगंधा तिवारी के संरक्षण तथा NAAC समन्वयक प्रोफेसर अलका श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम को महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर वंदना निगम एवं निदेशक प्रोफेसर अर्चना वर्मा का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि छात्राओं ने भी सक्रिय सहभागिता करते हुए अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा किए। उनके अनुभवों ने कार्यक्रम को और अधिक जीवंत और भावनात्मक बना दिया, जिससे एक सकारात्मक और संवादात्मक वातावरण तैयार हुआ।
इस आयोजन को सफल बनाने में विभाग की प्रभारी डॉ. शिप्रा श्रीवास्तव, डॉ. सुषमा शर्मा, डॉ. वंदना द्विवेदी, अपूर्वा बाजपेयी और ज्योति गुप्ता का विशेष योगदान रहा। साथ ही भूगोल विभाग की डॉ. अंजना श्रीवास्तव एवं अर्थशास्त्र विभाग की प्रभारी डॉ. साधना सिंह की उपस्थिति और सहभागिता भी सराहनीय रही।
यह व्याख्यान न केवल छात्राओं के मानसिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हुआ, बल्कि उन्हें अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करने वाला भी सिद्ध हुआ।

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