कानपुर। शहर में आयोजित पहले ‘राष्ट्रीय दिव्यांग वैवाहिक परिचय सम्मेलन’ में रविवार को उम्मीद, विश्वास और खुशियों का अनूठा संगम देखने को मिला। ‘दिव्यांग हमसफर’ और स्थानीय संस्था निराश्रित समाज सेवा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों से आए 300 से अधिक दिव्यांग युवक-युवतियों ने पूरे उत्साह के साथ पंजीकरण कराया और अपने जीवनसाथी की तलाश में सहभागिता की।
कार्यक्रम की सबसे बड़ी सफलता एक खूबसूरत रिश्ते के रूप में सामने आई, जब ग्वालियर से आए नेत्रहीन युवक अखिलेश और जबलपुर की नेत्रहीन युवती सपना साहू ने एक-दूसरे को अपना जीवनसाथी चुना। मंच पर दोनों ने एक-दूसरे का हाथ थामकर साथ निभाने का संकल्प लिया तो पूरा सभागार तालियों की गूंज से भर उठा। यह दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति के लिए भावुक और प्रेरणादायक क्षण बन गया।
सम्मेलन की खास बात यह रही कि इसमें केवल सामान्य पृष्ठभूमि ही नहीं, बल्कि उच्च शिक्षित और विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत दिव्यांगों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। परिचय देने वालों में बैंक कर्मचारी, आईटी इंजीनियर समेत कई प्रोफेशनल्स शामिल रहे, जिन्होंने यह साबित किया कि शारीरिक सीमाएं प्रतिभा और पारिवारिक जीवन के सपनों के आड़े नहीं आतीं।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कानपुर की महापौर श्रीमती प्रमिला पांडेय ने प्रतिभागियों को स्नेह और आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य करते हैं और दिव्यांगों को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर प्रदान करते हैं। वहीं, जयपुर से पधारे संत स्वामी जयकुमार उदासी जी ने अपने आशीर्वचन में संस्था के सेवा कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रयास समाज में नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार करते हैं।
विशिष्ट अतिथियों में कानपुर साईं स्पेशल स्कूल की निदेशक रीना सिंह और लखनऊ स्थित डॉ. शकुंतला मिश्रा दिव्यांग विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मृत्युंजय मिश्रा भी शामिल हुए। सभी अतिथियों ने दिव्यांगों को मुख्यधारा से जोड़ने और उनके सशक्तिकरण की दिशा में इस पहल को मील का पत्थर बताया।
आयोजकों ने बताया कि ‘दिव्यांग हमसफर’ द्वारा यह अभियान राष्ट्रीय स्तर पर संचालित किया जा रहा है। वर्तमान में इसके एंड्रॉइड ऐप पर 16 हजार से अधिक दिव्यांग पंजीकृत हैं, जो तकनीक के माध्यम से अपने लिए उपयुक्त जीवनसाथी की तलाश कर रहे हैं। सम्मेलन ने न केवल कई नए रिश्तों की नींव रखी, बल्कि समाज को यह संदेश भी दिया कि सच्चे रिश्ते दिल से बनते हैं, किसी शारीरिक बाधा से नहीं।
दिव्यांग सम्मेलन में बने रिश्ते