कानपुर। रंगों के पर्व होली को लेकर इस बार औद्योगिक नगरी कानपुर के बाजारों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। व्यापारिक संगठनों के अनुमान के अनुसार इस वर्ष होली पर शहर में करीब 250 करोड़ रुपये के कारोबार की संभावना है। गोविंद नगर से लेकर हटिया बाजार, मेस्टन रोड, बिसाती बाजार, नया गंज और गुमटी नंबर–5 तक खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ी हुई है। शहर में होली का रंग पूरे सात दिन तक छाया रहने की उम्मीद जताई जा रही है।
पिचकारियों में परंपरा और ट्रेंड का संगम
इस बार बाजार में पिचकारियों की लंबी रेंज आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। लड्डू गोपाल की गोल्डन फाउंटेन पिचकारी, धनुष-बाण, फरसा और क्रिस डिजाइन वाली पारंपरिक पिचकारियों के साथ-साथ डोरेमोन, पिंगपोंग, रॉकेट लॉन्चर और प्रेशर टैंक जैसी आधुनिक पिचकारियों की भी खूब बिक्री हो रही है। पिचकारियों की कीमत 12 रुपये से लेकर 1200 रुपये तक रही।
सियासी रंग भी चढ़ा बाजार पर
होली बाजार में राजनीतिक रंग भी साफ नजर आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मुखौटों की जबरदस्त मांग रही। वहीं ‘भाभी जी’ सेल्फी चश्मा और ‘मोगैंबो’ कैप युवाओं के बीच खासे लोकप्रिय रहे। व्यापारियों के अनुसार होली से पहले ही इन उत्पादों का अधिकांश स्टॉक बिक चुका है।
हटिया खोया मंडी में 50 करोड़ का कारोबार
हटिया खोया मंडी में इस बार लगभग 50 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ। बाजार एसोसिएशन के मुताबिक मिलावट रोकने के लिए विशेष टीमें तैनात रहीं। चॉकलेट खोया, चंद्रकला और ड्राई फ्रूट गुझिया की रेडीमेड वैरायटी की जमकर बिक्री हुई। हालांकि बड़ी कंपनियों के पैक्ड और ऑनलाइन उत्पादों से स्थानीय कारोबार को चुनौती मिली, फिर भी हटिया का खोया यूपी के 22–23 जिलों सहित अन्य राज्यों तक सप्लाई किया गया। कीमतों में करीब 20 रुपये प्रति किलो की गिरावट के बावजूद बिक्री संतोषजनक रही।
अरारोट से बना ‘कनपुरिया’ गुलाल पहली पसंद
इको-फ्रेंडली उत्पादों की बढ़ती मांग के चलते इस बार अरारोट से बना ‘कनपुरिया’ गुलाल लोगों की पहली पसंद बना। प्राकृतिक रंगों और इत्र की खुशबू से तैयार यह गुलाल त्वचा के लिए सुरक्षित माना जा रहा है। थोक व्यापारियों के अनुसार केवल हटिया बाजार से करीब 2000 टन रंग-गुलाल की बिक्री हुई। मेंहदी और भगवा रंग के गुलाल ने भी खास आकर्षण पैदा किया।
कुल मिलाकर इस बार होली ने न केवल कानपुर को रंगों से सराबोर किया है, बल्कि बाजारों में भी नई ऊर्जा भर दी है। पारंपरिक उत्पादों से लेकर आधुनिक ट्रेंड तक, ‘कानपुरिया’ अंदाज ने एक बार फिर होली के बाजार को खास बना दिया।