कानपुर। शहर के सबसे व्यस्ततम इलाकों में शुमार बड़ा चौराहा स्थित इंडियन बैंक की शाखा परिसर से सामने आई एक घटना ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। आरोप है कि बैंक परिसर के भीतर तैनात एक कर्मचारी ने तीन बेजुबान कुत्तों को ज्वलनशील पदार्थ डालकर जिंदा जला दिया। इस कथित घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूरे शहर में हड़कंप मच गया है और पशु प्रेमियों व स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इंडियन बैंक परिसर में तीन लावारिस कुत्ते अक्सर मौजूद रहते थे। आरोप है कि बैंक में कार्यरत एक कर्मचारी ने उन कुत्तों पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगा दी। आग की लपटों में घिरे बेजुबान जानवरों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग स्तब्ध रह गए। कुछ ही देर में घटना की खबर फैलते ही इलाके में सनसनी फैल गई और बड़ी संख्या में लोग बैंक के बाहर एकत्र हो गए।
घटना का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में जानवरों के प्रति दिखाई गई कथित नृशंसता ने आम लोगों को झकझोर कर रख दिया है। सोशल मीडिया पर नेटिजन्स और पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने आरोपी कर्मचारी के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है। कई लोगों ने पुलिस प्रशासन और बैंक प्रबंधन को टैग करते हुए दोषी के विरुद्ध कठोर कदम उठाने की अपील की है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कोतवाली पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और जांच-पड़ताल शुरू की। कोतवाली प्रभारी जगदीश पांडेय ने बताया कि वायरल वीडियो की सत्यता की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि घटना किन परिस्थितियों में हुई, इसमें किसकी भूमिका है और वीडियो कितना प्रमाणिक है, इन सभी बिंदुओं पर गहन जांच की जा रही है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस अमानवीय घटना से स्थानीय व्यापारियों और निवासियों में भी गहरा रोष है। लोगों का कहना है कि एक प्रतिष्ठित बैंक के परिसर में इस तरह की घटना होना न केवल पशु सुरक्षा बल्कि सामाजिक और नैतिक मूल्यों पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। नागरिकों ने मांग की है कि दोषी को उदाहरण स्वरूप सजा दी जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होते ही दोषी के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वहीं, यह भी स्पष्ट किया गया है कि समाचार पत्र वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और वीडियो की प्रमाणिकता जांच का विषय है।