70 साल पुराने भूमि विवाद में केडीए की जीत, 20 बीघा जमीन पर हक बरकरार

कानपुर— देहली सुजानपुर स्थित करीब 20 बीघा (लगभग 20 करोड़ रुपये मूल्य) जमीन पर चले आ रहे 70 साल पुराने विवाद का आखिरकार पटाक्षेप हो गया है। एडीएम वित्त की अदालत ने अपने फैसले में उक्त भूमि पर कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) का हक मानते हुए आदेश दिया है कि यह जमीन केडीए के पास ही रहेगी। अदालत ने विशाल भारत को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी द्वारा दायर अमलदरामद के प्रार्थनापत्र को खारिज कर दिया है।एडीएम वित्त डॉ. विवेक चतुर्वेदी ने बताया कि यह मामला वर्ष 1956 से जुड़ा हुआ है। उस समय देहली सुजानपुर क्षेत्र में कई पट्टे किए गए थे, जिनमें से कुछ पट्टों को वर्ष 1982 में तत्कालीन एडीएम वित्त द्वारा निरस्त कर दिया गया था। इस निर्णय के खिलाफ विपक्षी पक्ष ने मंडलायुक्त न्यायालय और राजस्व बोर्ड में अपील दायर की थी। राजस्व बोर्ड ने वर्ष 1992 में पूरे प्रकरण को सुनवाई के लिए तत्कालीन जिलाधिकारी को भेज दिया। इसके बाद वर्ष 2006 में डीएम कोर्ट ने केडीए का नाम खारिज करते हुए जमीन का मालिकाना हक विशाल भारत को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी के पक्ष में माना। इस आदेश के खिलाफ केडीए ने मंडलायुक्त न्यायालय में अपील की, जहां मंडलायुक्त ने डीएम कोर्ट के आदेश को निरस्त कर दिया।मंडलायुक्त के इस फैसले के विरुद्ध सोसायटी ने राजस्व बोर्ड में अपील की। राजस्व बोर्ड ने वर्ष 2015 में डीएम के आदेश को बहाल करते हुए मंडलायुक्त के आदेश को निरस्त कर दिया और फैसला सोसायटी के पक्ष में सुना दिया। इसके बाद सोसायटी ने खतौनी में नाम दर्ज कराने के लिए एडीएम कोर्ट में अमलदरामद की याचिका दाखिल की, जिसमें केडीए का नाम हटाकर सोसायटी का नाम दर्ज करने की मांग की गई।
इसी बीच राजस्व बोर्ड के आदेश के खिलाफ केडीए ने उच्च न्यायालय में अपील दायर की। वर्ष 2022 में हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि पूरे प्रकरण की सुनवाई एडीएम वित्त की अदालत में की जाए। इसके अनुपालन में एडीएम वित्त डॉ. विवेक चतुर्वेदी की अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें और उपलब्ध अभिलेखों का परीक्षण किया।लंबी सुनवाई और दस्तावेजों के अवलोकन के बाद एडीएम वित्त कोर्ट ने अपने अंतिम निर्णय में देहली सुजानपुर की विवादित 20 बीघा जमीन का मालिकाना हक केडीए के पक्ष में माना। साथ ही विशाल भारत को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी के अमलदरामद के प्रार्थनापत्र को खारिज कर दिया गया। इस फैसले के बाद दशकों से चले आ रहे इस भूमि विवाद पर फिलहाल विराम लग गया है।

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