कानपुर— रावतपुर क्षेत्र स्थित विनायकपुर में हिन्दू धार्मिक ट्रस्ट के नाम पर कथित तौर पर कूटरचित दस्तावेज तैयार कर जमीन पर कब्जा करने के मामले में छह अधिवक्ताओं समेत आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है।पीड़ित डॉ. मेराज जाफरी, जो छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग में सहायक प्रवक्ता हैं, ने इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर अवैध कब्जा हटवाने की मांग की थी। शिकायत में उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में आराजी संख्या 806 में स्थित 141-141 गज के दो प्लॉट उनके दिवंगत पिता और माता के नाम विधिवत रूप से रजिस्टर्ड हुए थे, जिनका दाखिल-खारिज भी राजस्व अभिलेखों में दर्ज है।
आरोप है कि पड़ोस में रहने वाले कुछ लोगों ने दीवार तोड़कर प्लॉट पर अवैध रूप से प्रवेश किया और श्री रामलला ट्रस्ट के नाम से दूसरी आराजी संख्या दर्शाते हुए उर्दू भाषा में कूटरचित पट्टा तैयार कर जमीन पर कब्जा कर लिया। इसके बाद आरोपितों ने मौके पर निर्माण कार्य भी शुरू करा दिया। पीड़ित के अनुसार जब उन्होंने इसका विरोध किया तो आरोपित मारपीट पर आमादा हो गए।मामला न्यायालय तक पहुंचा, जहां पीड़ित पक्ष को स्थगनादेश भी मिला, लेकिन बाद में कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर वह आदेश हटवा लिया गया। इसके बाद पीड़ित के पिता के निधन के बाद दोबारा निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया।
पीड़ित द्वारा मुख्यमंत्री पोर्टल और जनता दरबार में लगातार शिकायत किए जाने के बाद पुलिस ने अब इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस के अनुसार नामजद आरोपितों में कई अधिवक्ता शामिल हैं। सभी संबंधित दस्तावेजों को जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है। साक्ष्यों और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की विधिक कार्यवाही की जाएगी।
फर्जी ट्रस्ट पट्टे से जमीन कब्जाने का मामला, छह वकीलों समेत आठ पर एफआईआर