इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 पर वर्किंग ग्रुप के खिलाफ बिजली कर्मियों का विरोध

कानपुर— विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने केंद्रीय विद्युत मंत्रालय द्वारा इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने के लिए गठित वर्किंग ग्रुप पर गहरी आपत्ति दर्ज कराई है। संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि इस वर्किंग ग्रुप की रिपोर्ट के आधार पर बिल को भारतीय संसद में पेश करने का प्रयास किया गया, तो देशभर में व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, 30 जनवरी 2026 को केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने एक आदेश जारी कर कथित तौर पर गुपचुप तरीके से वर्किंग ग्रुप का गठन किया। आदेश में वर्किंग ग्रुप को मात्र 14 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है, जिसे समिति ने इतने व्यापक और दूरगामी प्रभाव वाले विषय के लिए अत्यंत जल्दबाजी बताया।
संघर्ष समिति ने विशेष आपत्ति जताई कि वर्किंग ग्रुप में ऑल इंडिया डिस्कॉम्स एसोसिएशन के डायरेक्टर जनरल को शामिल किया गया है, जबकि यह संस्था सोसाइटी एक्ट के तहत पंजीकृत एक निजी संगठन है। समिति का कहना है कि इस संगठन के कई पदाधिकारी सार्वजनिक मंचों पर वितरण क्षेत्र के निजीकरण की वकालत करते रहे हैं। नवंबर 2025 में आयोजित एक बैठक का हवाला देते हुए संघर्ष समिति ने कहा कि उस दौरान भी डिस्कॉम के घाटे से उबरने का प्रमुख उपाय निजीकरण बताया गया था।
समिति ने यह भी आरोप लगाया कि डिस्कॉम संगठन के महामंत्री उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष आशीष गोयल हैं, जो पिछले 14 महीनों से पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहे हैं।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने कहा कि जब एक निजी संस्था को वर्किंग ग्रुप में स्थान दिया गया है, तो बिजली क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों और इंजीनियरों के राष्ट्रीय स्तर के संगठनों और फेडरेशनों को भी समान रूप से प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। समिति का आरोप है कि केंद्र सरकार इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 को जल्दबाजी में अंतिम रूप देकर संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में पेश करना चाहती है।
संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि देश के लगभग 27 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर इस बिल को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं करेंगे। यदि कर्मचारियों और इंजीनियरों की आशंकाओं की अनदेखी कर बिल को आगे बढ़ाया गया, तो इसके खिलाफ देशव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

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