कानपुर। स्टेट जीएसटी और आरटीओ प्रशासन द्वारा ट्रांसपोर्टरों के कथित उत्पीड़न को लेकर उत्तर प्रदेश ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। सोमवार को ट्रांसपोर्ट नगर स्थित एसोसिएशन कार्यालय में आयोजित आमसभा में पदाधिकारियों और ट्रांसपोर्टरों ने सरकार व विभागीय अधिकारियों के खिलाफ आक्रोश जताते हुए चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र विचार नहीं किया गया तो पूरे प्रदेश में ट्रांसपोर्ट चक्का जाम किया जाएगा। आमसभा को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष मनीष कटारिया ने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि वाहनों पर जीपीएस लगाने का आदेश कुछ चुनिंदा कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए थोपा जा रहा है और ट्रांसपोर्टरों पर उन्हीं कंपनियों के उपकरण लगाने का दबाव बनाया जा रहा है, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। बैठक में स्टेट जीएसटी अधिकारियों द्वारा सड़कों पर गाड़ियां रोककर की जा रही चेकिंग और भारी जुर्माने को लेकर भी नाराजगी जताई गई और आरोप लगाया गया कि बार-बार शिकायतों के बावजूद जीएसटी अधिकारी अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं ला रहे हैं, बेवजह वाहनों को रोकना और मोटा जुर्माना थोपना अब बर्दाश्त से बाहर है। इसके साथ ही ट्रांसपोर्टरों ने सरकार द्वारा लागू किए जा रहे ‘वन टाइम टैक्स’ का भी खुलकर विरोध किया और कहा कि पुराने मॉडल की गाड़ियों पर यह नियम अव्यावहारिक है, जिससे छोटे ट्रांसपोर्टरों का कारोबार बंद होने की कगार पर पहुंच जाएगा। मनीष कटारिया ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार और प्रशासन ने ट्रांसपोर्टरों के हितों की अनदेखी जारी रखी तो प्रदेश भर के ट्रांसपोर्टर और व्यापारी एकजुट होकर सड़कों पर उतरेंगे और जरूरत पड़ी तो मुख्यमंत्री के समक्ष प्रतिनिधिमंडल भेजकर अपनी मांगें रखी जाएंगी। आमसभा में अजय कुमार कपूर, गुलशन छाबड़ा, अरुण वाधवा, राजू तिवारी सहित बड़ी संख्या में ट्रांसपोर्टर और व्यापारी मौजूद रहे, वहीं प्रमुख मांगों में जीपीएस के नाम पर चुनिंदा कंपनियों का एकाधिकार खत्म करना, स्टेट जीएसटी की सड़क चेकिंग के नाम पर हो रहे उत्पीड़न को रोकना, पुराने मॉडल की गाड़ियों को वन टाइम टैक्स के दायरे से बाहर रखना और आरटीओ प्रशासन की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाना शामिल है।
जीएसटी–आरटीओ उत्पीड़न के खिलाफ ट्रांसपोर्टरों का आंदोलन