कानपुर। भक्ति, श्रद्धा और उल्लास के रंग में रविवार को पूरा मोतीझील परिसर सराबोर नजर आया, जब श्री बाँके बिहारी जी परिवार समिति द्वारा आयोजित प्रथम श्रीमद् भागवत महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। कथा स्थल मोतीझील लॉन में चारों ओर “राधे-राधे” और “जय श्रीकृष्ण” के जयघोष गूंजते रहे, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
महोत्सव का शुभारंभ विधिवत वेदी पूजन के साथ हुआ। इसके पश्चात मलिक रेजीडेंसी होटल (80 फीट रोड) से एक भव्य कलश एवं पोथी यात्रा निकाली गई। इस यात्रा में एक समान पारंपरिक वेशभूषा में सजी 251 महिलाएं सिर पर कलश धारण कर शामिल हुईं। कलश यात्रा अशोक नगर और लाजपत भवन होते हुए कथा स्थल तक पहुंची। मार्ग में श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर यात्रा का स्वागत किया, जिससे पूरा मार्ग भक्तिमय दृश्य में बदल गया।
कथा के प्रथम दिवस विश्वविख्यात कथा व्यास परम श्रद्धेय आचार्य मृदुल कृष्ण शास्त्री (वृन्दावन) ने व्यास पीठ से श्रीमद् भागवत कथा के महात्म्य का रसपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि “भागवत कथा का श्रवण मात्र ही मनुष्य के जीवन से दुखों का नाश कर देता है और उसे भक्ति व मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करता है।”
कथा के दौरान जब आचार्य मृदुल कृष्ण शास्त्री ने अपने सुप्रसिद्ध भजनों की प्रस्तुति दी, तो पूरा पंडाल भक्ति रस में डूब गया।
“राधे राधे जपा करो, कृष्ण नाम रस पिया करो”,
“मुझे चरणों से लगा ले मेरे श्याम मुरली वाले”
और
“करके इशारों बुलाये गई रे बरसाने की छोरी”
जैसे भजनों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूमते नजर आए।
कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन दैनिक जागरण के चेयरमैन महेंद्र मोहन गुप्त एवं महापौर प्रमिला पाण्डेय द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर एवं व्यास पीठ का पूजन कर किया गया। इस अवसर पर अतिथियों ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना का संचार करते हैं।
आयोजन को सफल बनाने में समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों की अहम भूमिका रही। विशेष रूप से संजय गुप्ता, पंकज बंका, विनोद मुरारका, राजेंद्र गुप्ता, राम किशन गुप्ता, राम किशन अग्रवाल, अंकुर सिंघल एवं राज कुमार गुप्ता सहित समिति के तमाम पदाधिकारी व्यवस्थाओं में सक्रिय रूप से जुटे रहे।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के चलते मोतीझील परिसर देर शाम तक भक्ति, संगीत और उल्लास के माहौल में डूबा रहा। पूरा क्षेत्र ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो वृन्दावन की रसमयी अनुभूति मोतीझील में साकार हो उठी हो।
मोतीझील में भागवत रसधारा