ई-साइकिल वितरण में आईआईटी कानपुर का नाम गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज

कानपुर।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर ने एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम की है। आईआईटी कानपुर को सबसे बड़े इलेक्ट्रिक साइकिल वितरण कार्यक्रम के लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में संयुक्त रूप से मान्यता प्राप्त हुई है। यह उपलब्धि ई-साइकिल कार्यक्रम के अंतर्गत ईमोटोरैड, कुप्पम क्षेत्र विकास प्राधिकरण, चित्तूर जिला कलेक्टरेट तथा आंध्र प्रदेश सरकार के सहयोग से हासिल की गई।
यह रिकॉर्ड स्थापित करने वाला वितरण कार्यक्रम गत सप्ताह आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा कुप्पम क्षेत्र विकास प्राधिकरण के माध्यम से आयोजित किया गया था। कार्यक्रम के दौरान आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए आधिकारिक गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स प्रमाणपत्र प्रदान किया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य कुप्पम विधानसभा क्षेत्र में सतत, पर्यावरण-अनुकूल और कम-कार्बन स्थानीय परिवहन को बढ़ावा देना रहा।
आईआईटी कानपुर ने कुप्पम नेट ज़ीरो विधानसभा क्षेत्र परियोजना के अंतर्गत तकनीकी भागीदार के रूप में इस कार्यक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संस्थान के दो पूर्व छात्र—हरि शंकर, जो कुप्पम नेट ज़ीरो विधानसभा क्षेत्र परियोजना के परामर्शदाता हैं, तथा विकास मरमत (आईएएस), परियोजना निदेशक, कुप्पम क्षेत्र विकास प्राधिकरण—ने कार्यक्रम के समन्वय और क्रियान्वयन में अहम योगदान दिया।
इस अवसर पर आईआईटी कानपुर का प्रतिनिधित्व परियोजना के प्रधान अन्वेषकों प्रो. मनोज के. तिवारी एवं प्रो. राजीव जिंदल ने किया। दोनों वैज्ञानिकों ने इस उपलब्धि को सततता आधारित नवाचार और सार्वजनिक-क्षेत्र सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रोफेसर मणिंद्र अग्रवाल ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में आईआईटी कानपुर का संयुक्त रूप से दर्ज होना संस्थान के लिए अत्यंत गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि यह सफलता सतत विकास, स्वच्छ मोबिलिटी और सामाजिक सरोकारों से प्रेरित नवाचार के प्रति संस्थान की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है। कुप्पम नेट ज़ीरो विधानसभा परियोजना तकनीक, नीति और प्रशासन के प्रभावी समन्वय से समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
प्रो. तिवारी और प्रो. जिंदल ने भी गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स से प्राप्त इस मान्यता को आईआईटी कानपुर के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताते हुए कहा कि यह उपलब्धि उच्च-प्रभावी और सततता-केंद्रित परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में संस्थान के निरंतर प्रयासों को मजबूती प्रदान करती है। उन्होंने इस परियोजना को सफल बनाने में सहयोग देने वाले आईआईटी कानपुर प्रशासन, साझेदार संस्थाओं और सभी हितधारकों के प्रति आभार व्यक्त किया। यह उपलब्धि न केवल आईआईटी कानपुर के लिए, बल्कि देश में हरित परिवहन और नेट-ज़ीरो लक्ष्यों की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के लिए भी एक प्रेरणास्रोत मानी जा रही है।

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