कानपुर।
अपनी अनूठी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपराओं के लिए पूरे देश में विख्यात कानपुर का प्रसिद्ध हटिया गंगा मेला इस वर्ष 10 मार्च को भव्य और ऐतिहासिक स्वरूप में आयोजित किया जाएगा। होली के पर्व से आरंभ होने वाला कानपुर का यह विशेष उत्सव गंगा मेले तक निरंतर उल्लास और उत्साह के साथ मनाया जाता है, जो शहर की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है।
हटिया गंगा मेले की तैयारियों को अंतिम रूप देने के उद्देश्य से कानपुर नगर निगम पूरी तरह सक्रिय हो गया है। नगर निगम के मुख्य अभियंता सैय्यद जैदी अफरीदी ने अधिकारियों की टीम के साथ बादशाही नाका स्थित हनुमान मंदिर से लेकर हटिया के ऐतिहासिक रज्जन बाबू पार्क तक सघन निरीक्षण किया और मौके पर ही आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।
2026 में पर्वों की प्रमुख तिथियां
वर्ष 2026 में होली से गंगा मेले तक पर्वों की श्रृंखला इस प्रकार निर्धारित है—
2 मार्च (सोमवार): होलिका दहन
3 मार्च: चंद्रग्रहण के कारण सूतक काल, विशेष सावधानी
4 मार्च: रंगों की होली
10 मार्च (मंगलवार): ऐतिहासिक हटिया गंगा मेला
होली से पहले पूरे होंगे ये कार्य
निरीक्षण के दौरान मुख्य अभियंता ने निर्देश दिए कि होली से पूर्व सभी आवश्यक कार्य अनिवार्य रूप से पूरे किए जाएं। इनमें प्रमुख रूप से—
रज्जन बाबू पार्क में टूटे हुए टीन शेड और फर्श की तत्काल मरम्मत
मेला स्थल पर एक नए और भव्य प्रवेश द्वार (गेट) का निर्माण
पूरे पार्क की रंगाई-पुताई एवं पेड़ों की छंटाई
विशेष सफाई अभियान और बेहतर प्रकाश व्यवस्था
सड़क एवं पाइपलाइन कार्यों पर विशेष निगरानी
खुदी सड़कों पर जताई नाराजगी
निरीक्षण के दौरान हटिया पार्क से जनरल गंज, लाठी मोहाल और कमला टावर होते हुए संगम लाल मंदिर तक जल-कल विभाग द्वारा पाइपलाइन बिछाने के लिए खोदी गई सड़कों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। इस पर मुख्य अभियंता ने जल-कल विभाग के महाप्रबंधक से वार्ता कर यह सुनिश्चित किया कि गंगा मेले से पूर्व सभी सड़कों की मरम्मत कर आवागमन पूरी तरह सुचारू कराया जाए, ताकि श्रद्धालुओं और आमजन को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
गंगा मेला कमेटी ने अधिकारियों को दी जानकारी
निरीक्षण के दौरान कानपुर हटिया होली मेला (गंगा मेला) महोत्सव कमेटी के अध्यक्ष ज्ञानेंद्र विश्नोई और महामंत्री विनय सिंह ने अधिकारियों को मेले के ऐतिहासिक महत्व और संभावित भारी जनसमूह की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गंगा मेला न केवल धार्मिक उत्सव है, बल्कि यह कानपुर की सामाजिक एकता और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी भावना का प्रतीक भी है।
इस अवसर पर रोहित बाजपेई, ऋषि तिवारी और क्षेत्रीय पार्षद अमित गुप्ता सहित नगर निगम के जोनल अभियंता आर.के. तिवारी, अवर अभियंता माणिक चंद्र, जल-कल अभियंता राजकुमार तथा स्वास्थ्य विभाग के विपिन कुमार मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
होली से गंगा मेले तक चलता है रंगों का उत्सव
कमेटी अध्यक्ष ज्ञानेंद्र विश्नोई ने बताया कि कानपुर की होली पूरे देश में अपनी अलग पहचान रखती है। यहां रंगों का उत्सव केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि अनुराधा नक्षत्र तक यानी गंगा मेले तक निरंतर चलता है। यह परंपरा ब्रिटिश शासन काल में भारतीय एकता और सामाजिक समरसता के प्रतीक के रूप में शुरू हुई थी, जो आज भी उसी गौरव के साथ निभाई जा रही है।
नगर निगम अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि इस ऐतिहासिक आयोजन को भव्य, सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी जाएगी, ताकि कानपुर की सांस्कृतिक विरासत का यह पर्व पूरे वैभव के साथ संपन्न हो सके।
कानपुर की ऐतिहासिक विरासत: 10 मार्च को सजेगा हटिया गंगा मेला, नगर निगम ने कसी कमर