कानपुर।
आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत आयुष्मान कार्ड निर्माण में अपेक्षित प्रगति न मिलने पर जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह ने सख्त रुख अपनाया है। सरसैया घाट स्थित नवीन सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने शिवराजपुर, बिल्हौर और भीतरगांव के एमओआईसी की कार्यप्रणाली पर गहरा असंतोष व्यक्त करते हुए उनके विरुद्ध कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आयुष्मान कार्ड एक जीवनरक्षक और अत्यंत महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजना है, जिसे प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जाना चाहिए। इस योजना में किसी भी स्तर पर की गई शिथिलता को गंभीरता से लिया जाएगा और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय की जाएगी।
समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि जनवरी माह में अब तक केवल 7,258 नए आयुष्मान कार्ड ही बनाए जा सके हैं, जो लक्ष्य की तुलना में बेहद कम है। इस पर नाराजगी जताते हुए जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि अभियान को तत्काल युद्ध स्तर पर चलाया जाए और शेष सभी पात्र लाभार्थियों के आयुष्मान कार्ड बिना किसी देरी के तैयार कराए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि 3 फरवरी को पुनः समीक्षा की जाएगी और यदि प्रगति संतोषजनक नहीं पाई गई तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि जनपद कानपुर नगर में अब तक कुल 8 लाख 64 हजार 21 आयुष्मान कार्ड निर्गत किए जा चुके हैं। वहीं वय वंदना योजना के अंतर्गत 70 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के 79,533 वरिष्ठ नागरिकों के आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं, जिसके आधार पर इस श्रेणी में कानपुर नगर प्रदेश में प्रथम स्थान पर है। इस उपलब्धि की सराहना करते हुए जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि इसी प्रकार अन्य श्रेणियों में भी कार्य की गति बढ़ाई जाए।
समीक्षा बैठक में जन आरोग्य समिति के अंतर्गत नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (यूपीएचसी) में बजट व्यय की स्थिति भी जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत की गई, जिस पर उन्होंने गहरी नाराजगी व्यक्त की। ग्वालटोली, जूही, जागेश्वर, बेनाझाबर, सर्वोदय नगर और अनवरगंज यूपीएचसी में आवंटित धनराशि का उपयोग अत्यंत सीमित पाया गया। वहीं रामबाग यूपीएचसी द्वारा प्राप्त धनराशि का समुचित उपयोग न किया जाना गंभीर लापरवाही की श्रेणी में माना गया।
जिलाधिकारी ने सात नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों द्वारा जन आरोग्य समिति के अंतर्गत प्राप्त धनराशि का संतोषजनक उपयोग न किए जाने पर शासन को पत्र भेजने के निर्देश मुख्य चिकित्साधिकारी को दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह धनराशि मरीजों की सुविधाओं, उपचार व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के लिए है। भविष्य में किसी भी प्रकार की वित्तीय या प्रशासनिक लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जाएगी।
इस समीक्षा बैठक में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमी, डिप्टी सीएमओ डॉ. आर.पी. यादव सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनहित से जुड़ी योजनाओं को पूरी गंभीरता, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ लागू किया जाए, ताकि पात्र लाभार्थियों को समय पर उनका अधिकार मिल सके।
आयुष्मान कार्ड निर्माण में लापरवाही पर सख्त रुख, तीन एमओआईसी को कारण बताओ नोटिस