मेयर–पार्षद विवाद नहीं थमा, प्रदेशाध्यक्ष के दौरे से पहले सुलह की कवायद तेज

कानपुर। नगर निगम में मेयर और पार्षदों के बीच चल रहा विवाद लगातार गहराता जा रहा है और अब तक इसका कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है। मामला संगठन के बड़े पदाधिकारियों से लेकर प्रभारी मंत्री और मुख्यमंत्री तक पहुंच चुका है, इसके बावजूद गतिरोध बना हुआ है। इसी बीच भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के 22 जनवरी को प्रस्तावित कानपुर दौरे को लेकर संगठन में बेचैनी बढ़ गई है। संगठन के पदाधिकारी चाहते हैं कि प्रदेशाध्यक्ष के शहर आगमन से पहले इस विवाद को सुलझा लिया जाए, ताकि पार्टी और जिले की छवि प्रभावित न हो।
इसी कड़ी में मंगलवार को भाजपा कार्यालय में संगठन के पदाधिकारियों की एक अहम बैठक की तैयारी की जा रही है। बैठक में मेयर और पार्षदों के बीच चल रहे विवाद, उसके कारणों और संभावित समाधान पर मंथन किए जाने की संभावना है। संगठन स्तर पर यह कोशिश की जा रही है कि आंतरिक कलह को सार्वजनिक मंच पर जाने से पहले ही थाम लिया जाए।
दरअसल, विवाद की जड़ नगर निगम के मंगल भवन में रविवार को आयोजित एक सामूहिक विवाह कार्यक्रम से जुड़ी है। बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम के लिए पार्षद वेलफेयर एसोसिएशन के नाम से मंगल भवन की बुकिंग कराई गई थी, जहां 11 कन्याओं का सामूहिक विवाह संपन्न कराया गया। इस कार्यक्रम में मेयर प्रमिला पांडेय, उनके पुत्र बंटी पांडेय समेत कई गणमान्य लोग शामिल हुए थे। कार्यक्रम के संपन्न होते ही मंगल भवन की बुकिंग और पार्षद वेलफेयर एसोसिएशन के अस्तित्व को लेकर सवाल उठने लगे।
मेयर का विरोध कर रहे पार्षदों का कहना है कि पार्षद वेलफेयर एसोसिएशन नाम की कोई वैधानिक संस्था ही नहीं है, फिर उसके नाम से नगर निगम की संपत्ति मंगल भवन की बुकिंग कैसे कर दी गई। इस मुद्दे को लेकर कुल छह पार्षद खुलकर सामने आ गए हैं और उन्होंने संगठन के समक्ष अपना विरोध दर्ज कराया है।
मंगल भवन में कार्यक्रम आयोजित होने के बाद बागी हुए इन छह पार्षदों ने जिलाध्यक्ष से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन देने वालों में नगर निगम से निलंबित चल रहे पार्षद पवन गुप्ता और अंकित मौर्य के साथ ही भाजपा पार्षद विकास जायसवाल, आलोक पांडेय, हरि स्वरूप तिवारी और लक्ष्मी कोरी शामिल हैं। पार्षदों ने आरोप लगाया कि असंवैधानिक तरीके से पार्षद वेलफेयर के नाम पर सामूहिक विवाह का आयोजन किया गया, जो नियमों के खिलाफ है।पार्षदों ने जिलाध्यक्ष को यह भी याद दिलाया कि 12 जनवरी को प्रभारी मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने उन्हें आश्वासन दिया था कि उनके निलंबन को निरस्त किया जाएगा और पार्षद वेलफेयर से जुड़े मामले पर भी निर्णय लिया जाएगा। इस आश्वासन के बाद वे शांत हो गए थे, लेकिन मंगल भवन में कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें खुली चुनौती दी गई है, जिससे उनका आक्रोश फिर भड़क उठा है।अब संगठन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि प्रदेशाध्यक्ष के कानपुर आगमन से पहले इस पूरे विवाद को कैसे सुलझाया जाए। यदि समय रहते समाधान नहीं निकला, तो यह आंतरिक कलह पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकती है और संगठनात्मक छवि को भी नुकसान पहुंचा सकती है।

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