पुलिसकर्मी पर तमंचे के बल पर लूट, नकदी व लैपटॉप छीनने का आरोप

पीड़ित ने थाना सचेंडी में दी लिखित तहरीर, जान से मारने की धमकी का भी दावा
कानपुर।
थाना सचेंडी क्षेत्र में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक व्यक्ति ने स्वयं को उत्तर प्रदेश पुलिस का कर्मचारी बताने वाले युवक पर तमंचे के बल पर लूट, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित ने इस संबंध में थाना प्रभारी सचेंडी को लिखित प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार रवेंद्र कुमार पुत्र मुन्ना लाल, निवासी ग्राम रजनापुर मूल (नियर धरमंगदपुर), कानपुर नगर ने अपने प्रार्थना पत्र में बताया कि 07 जनवरी 2026 को शाम लगभग 4 से 5 बजे वह चकरपुर क्षेत्र में अपने वाहन छोटा हाथी की रिपेयरिंग करवा रहा था। इसी दौरान सौरभ कुमार उर्फ अज्जू, पुत्र योगेंद्र कुमार, निवासी ग्राम मन्नीपुरवा, थाना पनकी, जो स्वयं को उत्तर प्रदेश पुलिस से जुड़ा बताता है, उसका पीछा करते हुए मौके पर पहुंच गया।
पीड़ित के अनुसार आरोपी ने पहले उससे मौखिक विवाद किया और फिर भरोसे में लेकर उसे अपनी गाड़ी 2 टन ग्रैंड (UP-78 DS …) में बैठने को कहा। पीड़ित ने बताया कि वह अपनी बैग सहित गाड़ी में बैठ गया, जिसमें 78 हजार रुपये नकद और एक लैपटॉप रखा हुआ था।
आरोप है कि जैसे ही वह गाड़ी के अंदर बैठा, आरोपी ने वाहन का गेट लॉक कर दिया और उसके सिर पर तमंचा सटा दिया। इसके बाद आरोपी ने बैग से 78 हजार रुपये नगद छीन लिए तथा लैपटॉप को तोड़ दिया। इसके बाद आरोपी तेज रफ्तार में वाहन लेकर मौके से फरार हो गया।
पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया है कि जाते समय आरोपी ने उसे धमकी दी कि यदि उसने पुलिस में शिकायत की तो उसे जान से मार दिया जाएगा। इस धमकी के चलते वह काफी भयभीत हो गया। बाद में हिम्मत जुटाकर पीड़ित ने थाना सचेंडी पहुंचकर पूरे घटनाक्रम की लिखित शिकायत दी।
पीड़ित ने अपनी तहरीर में मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और उसे सुरक्षा प्रदान की जाए, क्योंकि आरोपी स्वयं को पुलिस से जुड़ा बताकर दबाव बना रहा है।
मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज है, वहीं पुलिस सूत्रों का कहना है कि प्रार्थना पत्र के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है। आरोपी के पुलिसकर्मी होने के दावे की भी सत्यता परखी जा रही है। समाचार लिखे जाने तक पुलिस विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था।
यह मामला एक बार फिर वर्दी की आड़ में अपराध करने के आरोपों को लेकर सवाल खड़े करता है और आम नागरिकों की सुरक्षा व विश्वास से जुड़े गंभीर मुद्दे को उजागर करता है।

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