समाज कल्याण सेवा समिति के ‘महामानव यज्ञ’ में ईसाई समुदाय ने किया कन्धादान, मानवता की मिसाल बनी लावारिस शव यात्रा

कानपुर।
शहर की समाज कल्याण सेवा समिति बीते एक दशक से भी अधिक समय से मानवता की मिसाल पेश करते हुए लावारिस शवों को सम्मानजनक अंतिम विदाई देने के अपने संकल्प पर निरंतर कार्य कर रही है। वर्ष 2009 में शुरू हुई इस अनूठी पहल के तहत अब तक 16,700 से अधिक लावारिस शवों का उनके-अपने धर्मों की परंपराओं के अनुसार अंतिम संस्कार कराया जा चुका है।
वर्तमान में समिति द्वारा आयोजित पाँच दिवसीय ‘कन्धादान अभियान’ का आज तीसरा दिन रहा, जिसने मानवता, करुणा और सर्वधर्म समभाव का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। इस अभियान के अंतर्गत प्रतिदिन विभिन्न धर्मों के धर्मगुरु अपने-अपने रीति-रिवाजों के अनुसार प्रार्थना कर लावारिस शवों को ससम्मान कन्धा देकर उनकी अंतिम यात्रा के लिए विदा करते हैं।
अभियान के तीसरे दिन ईसाई समुदाय ने पूरे श्रद्धा और संवेदनशीलता के साथ सहभागिता निभाई। ईसाई धर्मगुरुओं द्वारा विशेष प्रार्थनाएं की गईं, आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से कामना की गई और मोमबत्तियां जलाकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके पश्चात समुदाय के लोगों ने लावारिस शवों को कन्धा देकर उनकी अंतिम यात्रा का शुभारंभ किया।
जब यह शव यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुज़री, तो इसमें शहर के कई गणमान्य नागरिक भी शामिल हुए। यात्रा के दौरान लावारिस शवों पर एक क्विंटल से अधिक फूलों की वर्षा की गई। इस दृश्य को देखकर राहगीर ठिठक गए और पूछने लगे कि यह किस महापुरुष की अंतिम यात्रा है। जब उन्हें बताया गया कि यह एक लावारिस शव की अंतिम यात्रा है, तो लोगों की आंखें नम हो गईं और कई लोग स्वतः आगे बढ़कर शव को कन्धा देने के लिए आगे आ गए। देखते ही देखते लावारिस शवों को कन्धा देने की होड़ सी लग गई, जो समाज की संवेदनशीलता और मानवीय चेतना को दर्शाती है।
इस अवसर पर संस्था के सचिव धनीराम पैंथर ने कार्यक्रम में शामिल सभी लोगों एवं कन्धादान करने वालों का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस अभियान को ‘महामानव यज्ञ’ की संज्ञा देते हुए कहा कि इसमें समाज के प्रत्येक व्यक्ति का सहयोग अत्यंत आवश्यक है।
भावुक स्वर में उन्होंने कहा,
“यह कार्य इंसानियत से प्रेरित है। हमारे बीच रहने वाला इंसान जब अपनी पहचान खोकर मृत्यु को प्राप्त होता है, तो उसे लावारिस घोषित कर दिया जाता है। लेकिन एक इंसान दूसरे इंसान के रहते हुए लावारिस कैसे हो सकता है?”
उन्होंने शहरवासियों से अपील करते हुए कहा कि,
“मैं आप सभी से आग्रह करता हूँ कि सहयोग स्वरूप कफन दें, पन्नी दें, चादर दें, बांस दें और यदि यह भी संभव न हो, तो कम से कम इन लावारिस शवों को कन्धा देकर अपना मानव धर्म निभाएं।”
इसके साथ ही उन्होंने समाज के सक्षम वर्ग से भी अनुरोध किया कि समिति के साथ कार्यरत पाँच कर्मचारियों को गोद लेकर इस पुण्य कार्य में सहयोग प्रदान करें, ताकि यह सेवा निर्बाध रूप से चलती रहे। इस कन्धादान अभियान में सैकड़ों की संख्या में लोगों ने सहभागिता कर मानवता के इस महान कार्य को मजबूती प्रदान की। यह अभियान न केवल लावारिस शवों को सम्मान देता है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि मानवता सबसे बड़ा धर्म है।

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