कानपुर। बिठूर–चौबेपुर मार्ग स्थित ऑटोमैटिक फिटनेस स्टेशन (एटीएस) में कथित अनियमितताओं और भारी अवैध वसूली के आरोपों ने आखिरकार शासन स्तर का ध्यान खींच लिया है। परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कानपुर मंडलायुक्त से विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की है।
यह ऑटोमैटिक फिटनेस स्टेशन एक निजी कंपनी द्वारा संचालित है, जहां वाहनों के फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करने के नाम पर प्रति वाहन 8 से 10 हजार रुपये तक की अवैध वसूली किए जाने की शिकायतें सामने आई थीं।
ऑटो-लोडर संयुक्त कल्याण समिति की शिकायत से खुला मामला
उत्तर प्रदेश ऑटो-लोडर संयुक्त कल्याण समिति के प्रदेश अध्यक्ष राजीव जायसवाल ‘विक्की’ ने कुछ दिन पहले संभागीय परिवहन अधिकारी (डीटीओ) राकेंद्र कुमार सिंह को ज्ञापन सौंपकर फिटनेस प्रक्रिया में चल रही अनियमितताओं, जबरन वसूली और भ्रष्टाचार की ओर ध्यान आकर्षित कराया था। ज्ञापन में कहा गया था कि ऑटोमैटिक सिस्टम के नाम पर वाहन मालिकों से मनमानी राशि वसूली जा रही है।
शिकायत सामने आने के बाद यह मुद्दा तेजी से चर्चा में आया, और मामले का दायरा शासन स्तर तक पहुँच गया।
तीन सदस्यीय जांच समिति गठित
मामले की गंभीरता को देखते हुए मंडलायुक्त ने तत्काल एक तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन किया है। समिति में—
एडीएम सिटी डॉ. राजेश कुमार,
एआरटीओ प्रशासन कानपुर देहात प्रशांत तिवारी,
एमवीआई उमेश चंद्र
को शामिल किया गया है। टीम को ऑटोमैटिक फिटनेस स्टेशन के संचालन, शुल्क प्रक्रिया, वाहन फिटनेस टेस्टिंग की पारदर्शिता और कथित अवैध वसूली समेत सभी पहलुओं की गहन जांच का जिम्मा दिया गया है।
आरटीओ की निगरानी में शुरू हुई जांच
ज्ञापन प्राप्त होने के बाद संभागीय परिवहन अधिकारी राकेंद्र कुमार सिंह ने पहले ही उच्च स्तरीय जांच का आश्वासन दिया था। अब परिवहन आयुक्त के आदेश के बाद वे स्वयं जांच की निगरानी कर रहे हैं और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
जांच से जुड़े एक अधिकारी ने बताया—
“यदि जांच निष्पक्ष और साक्ष्य आधारित तरीके से की गई, तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। अवैध वसूली में शामिल पाए गए लोगों पर कठोर कार्रवाई तय है।”
उम्मीद—अनियमितताओं का होगा खुलासा
चल रहे विवाद के बीच वाहन मालिकों और परिवहन विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि यह जांच ऑटोमैटिक फिटनेस स्टेशन पर होने वाली प्रक्रियाओं की वास्तविक स्थिति को उजागर करेगी।
शासन स्तर पर संज्ञान के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि कथित अवैध वसूली, अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की परतें खुलेंगी और दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित होगी।