कानपुर। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कथित अवैध वसूली कांड में घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है। शुरुआती खुलासों को हल्के में लेने वाले अब सतर्क हो गए हैं, क्योंकि जांच के दायरे में कई ऐसे लोग हैं जो अब तक पर्दे के पीछे थे।सूत्रों के अनुसार, शिकायत-पत्र में नए साक्ष्य जोड़ने के साथ ही कई लोग अपने पुराने मोबाइल, चैट और लेन-देन के रिकॉर्ड मिटाने में जुट गए हैं। बताया जा रहा है कि यह तंत्र केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें कई स्तरों के “मैदानी खिलाड़ी” और “संरक्षण कवच” शामिल थे।आगामी शिकायत-पत्र में नेटवर्क की कार्यप्रणाली, फोन रिकॉर्ड, लेन-देन और अचानक संपत्ति वृद्धि के दस्तावेज शामिल हो सकते हैं। बर्रा स्थित संपत्ति और कथित सरकारी बंगले पर कब्जे से जुड़े तथ्य भी जांच का हिस्सा बन सकते हैं। नर्सिंग होम संघ और पैरामेडिकल समूह भी संभावित जांच के लिए आंतरिक तैयारी कर रहे हैं। प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि यदि मामला औपचारिक जांच तक पहुंचता है, तो प्राइवेट कर्मचारी के साथ कई विभागीय अधिकारी और बाहरी लोग भी पूछताछ में आ सकते हैं।सीएमओ ने मामले को संज्ञान में लिया है। प्राइवेट और संविदा कर्मचारियों ने अपना पक्ष रखा है, जबकि संविदा कर्मचारी कानूनी सलाह और डिप्टी सीएम तक मुद्दा पहुंचाने की तैयारी में हैं।अब सवाल यह है कि क्या यह मामला स्वास्थ्य विभाग की कथित वसूली प्रणाली की जड़ों तक पहुंचेगा या अन्य मामलों की तरह धीरे-धीरे फाइलों में दफन हो जाएगा। आने वाले दिनों में यह प्रकरण प्रशासनिक और स्वास्थ्य तंत्र में बड़ा मुद्दा बन सकता है।
स्वास्थ्य विभाग में कथित अवैध वसूली कांड में तेजी, कई नाम जांच के दायरे में