कानपुर/नई दिल्ली :
इंट्राऑक्युलर इम्प्लांट एंड रिफ्रैक्टिव सोसायटी ऑफ इंडिया (IIRSI 2025) का वार्षिक सम्मेलन यशोभूमि इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर, दिल्ली में शानदार सफलता के साथ संपन्न हुआ। दो दिनों तक चले इस प्रतिष्ठित सम्मेलन में 25 देशों से आए 700 से अधिक नेत्र विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और हेल्थ टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स ने भाग लिया।
इस वर्ष का मुख्य आकर्षण रहा—AI-पावर्ड आई स्कैन्स, जो अब बिना किसी शुरुआती लक्षण के ही डायबिटीज़, प्री-डायबिटीज़, हार्ट डिज़ीज़, हाइपरटेंशन और कई गंभीर सिस्टमेटिक कंडीशन्स के शुरुआती संकेत पहचानने में सक्षम हैं।
सम्मेलन के साइंटिफिक कमेटी चेयरमैन डॉ. (प्रो.) महिपाल सिंह सचदेव ने बताया कि आंख अब “संपूर्ण स्वास्थ्य का डायग्नोस्टिक मिरर” बन चुकी है। उन्होंने कहा, “AI-इनेबल्ड रेटिनल इमेजिंग अब केवल डायबिटिक रेटिनोपैथी पहचानने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्री-डायबिटीज़, कार्डियोवैस्कुलर रिस्क, ल्यूकेमिया और कुछ कैंसर से जुड़ी सूक्ष्म शुरुआती बदलावों का भी संकेत देती है। बढ़ते प्रदूषण का आंखों पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है, ऐसे में प्रिवेंटिव केयर बेहद आवश्यक है।”
AI तकनीक की मदद से अब रेटिनल इमेजिंग पहले से कई गुना तेज, सटीक और अधिक प्रेडिक्टिव हो गई है। एडवांस्ड एल्गोरिद्म कुछ ही सेकंड में हजारों रेटिनल तस्वीरें स्कैन कर लेते हैं और माइक्रोवैस्कुलर बदलावों की पहचान कर लेते हैं, जो आमतौर पर सामान्य जांच में दिखाई नहीं देते। इन बदलावों के आधार पर डायबिटीज़, हाइपरटेंशन, स्ट्रोक और हार्ट डिज़ीज़ के जोखिम का प्रारंभिक संकेत समय से पहले मिल जाता है।
IIRSI के प्रेज़िडेंट-इलेक्ट डॉ. (मेजर जनरल) जे.के.एस. परिहार ने कहा, “आज आंखों की जांच केवल आंखों की बीमारियों तक सीमित नहीं रही। हाई-प्रिसिशन स्कैनिंग अब मेटाबोलिक डिसॉर्डर्स और कार्डियोवैस्कुलर रिस्क का शुरुआती अलर्ट भी दे रही है। भारत जैसे देशों में, जहां नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज़ तेजी से बढ़ रही हैं, यह तकनीक एक बड़ा कदम है।”
सम्मेलन में यह भी स्पष्ट किया गया कि AI आधारित पोर्टेबल इमेजिंग टूल्स ग्रामीण भारत के लिए गेम-चेंजर साबित होंगे। जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता कम है, वहां ये टूल्स फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को उच्च-जोखिम वाले मरीजों की शुरुआती पहचान में मदद करेंगे। इससे समय रहते इलाज शुरू करना आसान होगा और गंभीर जटिलताओं को टाला जा सकेगा।
ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. रितिका सचदेव ने बताया कि IIRSI 2025 को इमर्सिव और इंटरैक्टिव लर्निंग फॉर्मेट में डिज़ाइन किया गया था। उन्होंने कहा, “आधुनिक पोर्टेबल इमेजिंग सिस्टम अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी प्रारंभिक डायबिटिक व कार्डियक रिस्क पहचानने में सक्षम हैं। जब ऐसे स्कैन प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचेंगे, तो देश में शुरुआती डायग्नोसिस और जोखिम प्रबंधन पूरी तरह बदल जाएगा।”
सम्मेलन में AI संचालित डायग्नॉस्टिक्स, एडवांस्ड इमेजिंग टेक्नोलॉजी, पोस्ट-कैटरेक्ट केयर, और लाइव सर्जरी सत्रों सहित कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक चर्चाएँ हुईं। 25 से अधिक देशों की भागीदारी ने इसे वैश्विक स्तर का नेत्र-विज्ञान मंच बना दिया।
IIRSI 2025 ने साबित किया कि आंखों के माध्यम से पूरे शरीर की बीमारियों की पहचान करने वाली यह नई AI तकनीक आने वाले वर्षों में हेल्थकेयर की तस्वीर बदल देगी।