कानपुर—रतनलाल नगर की सड़कों पर लटकती इंटरनेट केबलों की लापरवाही का खामियाजा इस बार एक मासूम जिंदगी ने भुगत लिया। गुरुवार रात हाईस्कूल के मेधावी छात्र सार्थक (15) की टूटे केबल में स्कूटी फंसने से दर्दनाक मौत हो गई। कोचिंग से घर लौट रहे सार्थक की स्कूटी जैसे ही पेड़ से उलझी लटकती केबल से टकराई, स्कूटी बुरी तरह फिसल गई और छात्र करीब 10 फीट उछलकर सड़क पर सिर के बल जा गिरा। हादसे की आवाज सुनकर आसपास के लोग दहल उठे—सड़क पर फैला खून और मांस के टुकड़े इस भयावह घटना की गवाही दे रहे थे।
सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि सार्थक करीब 30 मिनट तक सड़क पर तड़पता रहा, लेकिन समय पर कोई वाहन या एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं हो सका। दोस्तों ने राहगीरों से मदद की गुहार लगाई, पर देर हो चुकी थी। अंततः कोचिंग टीचर और राहगीरों की मदद से उसे किसी तरह प्राइवेट अस्पताल पहुंचाया गया, जहां से हालत गंभीर देखते हुए हैलट अस्पताल रेफर किया गया। डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया—और एक परिवार का दुनिया सूनी हो गई।
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**“मेरा बच्चा घर ही नहीं लौटा…”
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़**
गोविंद नगर 11 ब्लॉक में रहने वाले जतिन उर्फ चौधरी के घर में गुरुवार शाम तक सब कुछ सामान्य था। पिता की दादा नगर में कचरी और चिप्स बनाने की फैक्ट्री है। मां सोनम घर संभालती हैं। परिवार में दो बेटे—बड़ा सार्थक और छोटा साकार, जो क्लास 4 में पढ़ता है।
सार्थक रतनलाल नगर के द चिंटल्स स्कूल में हाईस्कूल का छात्र था और अमन इंद्रा क्लासेज में कोचिंग करता था। रोज की तरह गुरुवार को भी वह शाम 4 बजे कोचिंग के लिए निकला। लेकिन 6 बजे कोचिंग से निकलकर दोस्तों के साथ घर लौटते हुए आए इस हादसे ने पूरे परिवार को तोड़ दिया।
पिता जतिन ने रोते हुए बताया—
“रोज समझाता था—धीरे चलाना बेटा। समझदारी रखना।
लेकिन ऐसी मौत तो किसी को भी निगल सकती है।
सड़क पर ये तार कभी भी किसी की जिंदगी खत्म कर सकते हैं…”
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**हादसे का भयावह सच
—“हम आगे चल रहे थे, वो बस उड़ गया…”**
सार्थक के साथ जा रहे दोस्तों ने जो बताया, वह दिल दहला देने वाला है।
कोचिंग के बाद वे लोग बर्रा-4 पुल की ओर जा रहे थे। जैसे ही वे जैना पैलेस के पास पहुंचे, आगे चल रहे सार्थक की स्कूटी अचानक झटके से रुक गई।
दोस्त ने बताया—
“एक पेड़ से टूटी इंटरनेट केबल नीचे सड़क तक लटक रही थी।
सार्थक की स्कूटी उसके में फंस गई और वो जोर से उछलकर दूर जा गिरा।
हम लोग चिल्लाते रह गए…”
छात्र सड़क पर खून से लथपथ पड़ा था, सिर में गंभीर चोटें थीं। दोस्त रोते-बिलखते मदद मांगते रहे और मौके पर मौजूद लोगों से विनती करते रहे कि किसी तरह उसे अस्पताल पहुंचाया जाए।
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लटकती केबलों पर कभी कार्रवाई नहीं, कई बार हो चुके हादसे
स्थानीय लोगों की मानें तो रतनलाल नगर, दादा नगर और बर्रा क्षेत्र में इंटरनेट केबल कंपनियों द्वारा बेतरतीब तरीके से लगाए गए तार कई बार सड़क दुर्घटनाओं का कारण बन चुके हैं।
शिकायतें कई बार की गईं, पर न तो केबल ऑपरेटरों ने उन्हें हटाया और न ही नगर निगम ने कोई ठोस कदम उठाया।
लोगों ने गुस्से में कहा—
“ये हादसा सिर्फ एक लापरवाही की वजह से नहीं, सालों की उपेक्षा का नतीजा है।”
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पुलिस जांच में सामने आया कारण, FIR की तैयारी
हादसे की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा।
डीसीपी दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया—
“प्रारंभिक जांच में यह बात साफ है कि घटना टूटी इंटरनेट केबल में स्कूटी फंसने से हुई है।
परिजनों की तहरीर मिलते ही जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।”
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**एक सवाल—कब जागेगा प्रशासन?
आखिर कितनी जानें जाएंगी इन तारों से उलझकर?**
सार्थक की मौत ने एक बार फिर इंटरनेट केबलों के बेतरतीब जाल को कटघरे में खड़ा कर दिया है। शहर में हर गली-मोहल्ले में पेड़ों व खंभों से लटकते तार खतरे का कारण बने हुए हैं, लेकिन कोई विभाग जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं।
सवाल उठता है—
क्या कोई सार्थक जैसा होनहार छात्र अपनी जान गँवाने के बाद ही प्रशासन और सिस्टम जागेगा?
क्या सिर्फ FIR या कार्रवाई की घोषणा काफी है?
या फिर शहर को इन जानलेवा तारों से मुक्त करने के लिए कोई ठोस कदम उठाया जाएगा।
कानपुर में एक और परिवार अपना लाल खो चुका है।
और शहर फिर पूछ रहा है—
“किसकी गलती की सज़ा एक बच्चे को मिली।