कानपुर। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की माल रोड स्थित पर्सनल बैंकिंग ब्रांच (पीबीबी) में निष्क्रिय खाते को फर्जी ई-केवाईसी के जरिए सक्रिय कर 14.60 लाख रुपये निकालने के मामले में जांच का दायरा और बढ़ गया है। विजिलेंस टीम ने बैंक के तीन अधिकारियों और दो क्लर्कों को चार्जशीट देकर कार्रवाई शुरू कर दी है। इस प्रकरण में पहले ही एक उप प्रबंधक को निलंबित किया जा चुका है। अब फॉरेंसिक हैंडराइटिंग जांच कराई जा रही है ताकि संबंधित कर्मचारियों की लिखावट के जरिए साक्ष्य और पुख्ता किए जा सकें।
जानकारी के अनुसार, 121/363 सिविल लाइंस, कानपुर निवासी शिरोमणि यादव का खाता (संख्या 11022343963) एसबीआई में वर्ष 2006 से संचालित है। खाते में करीब 14.60 लाख रुपये जमा थे, लेकिन 2022 से कोई लेनदेन न होने पर इसे निष्क्रिय कर दिया गया था। अप्रैल 2025 में एक गुमनाम पत्र के जरिए बैंक के मुख्य महाप्रबंधक को जानकारी दी गई कि पीबीबी शाखा में तैनात एक उप प्रबंधक और कुछ अन्य कर्मचारियों ने मिलीभगत से इस निष्क्रिय खाते को 25 मार्च 2025 को फर्जी ई-केवाईसी के माध्यम से सक्रिय करा लिया।
सक्रिय होने के तुरंत बाद, दो अप्रैल 2025 को पांच लाख रुपये और नौ अप्रैल को 4.60 लाख रुपये बर्रा स्थित विश्व बैंक शाखा से निकाले गए। यह शाखा क्षेत्रीय कार्यालय-2 के अधीन नहीं आती, फिर भी खाते से भुगतान कर दिया गया। आरोप है कि पूरे प्रकरण में बैंकिंग नियमों की खुली अवहेलना की गई।
बाद में जब घोटाले का मामला उजागर हुआ, तो आरोपी उप प्रबंधक ने 11 अप्रैल को निकाली गई पूरी रकम वापस खाते में जमा कर दी। 15 अप्रैल को खाते को दोबारा निष्क्रिय कर दिया गया, जिससे पता चलता है कि बैंक के अंदर कई स्तरों पर गंभीर लापरवाही हुई।
विजिलेंस जांच में क्या हुआ अब तक:
तीन अफसरों और दो क्लर्कों को चार्जशीट देकर जवाब मांगा गया है।
सभी संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं।
संदिग्ध भुगतान के चेक, जमा वाउचर और ई-केवाईसी दस्तावेज जब्त कर लिए गए हैं।
दोनों शाखाओं (मॉल रोड पीबीबी और विश्व बैंक बर्रा) के सीसीटीवी फुटेज भी जांच में शामिल किए गए हैं।
अब फॉरेंसिक टीम के माध्यम से हस्तलिपि (हैंडराइटिंग) जांच कराई जा रही है ताकि दस्तावेजों पर हस्ताक्षर और लिखावट का मिलान किया जा सके।
जांच में सामने आए नए तथ्य:
स्रोतों के अनुसार, उप प्रबंधक ने भुगतान प्रक्रिया को तेज करने के लिए सिस्टम में मैनुअल ओवरराइड कराया था। वहीं, शाखा के अन्य कर्मचारियों ने दस्तावेजों की जांच किए बिना लेनदेन को स्वीकृत कर दिया। अब जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि फर्जी ई-केवाईसी किस सिस्टम आईडी से अपलोड की गई थी और किसने इसकी स्वीकृति दी थी।
विजिलेंस विभाग का कहना है कि प्रारंभिक जांच में बैंकिंग नियमों का गंभीर उल्लंघन हुआ है। पूरे प्रकरण की फाइल अब उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी ताकि आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई तय की जा सके।
एसबीआई अधिकारियों के लिए सबक बनी यह घटना:
एसबीआई प्रबंधन ने इस मामले को एक मिसाल के रूप में लेते हुए सभी शाखाओं को निर्देश जारी किए हैं कि निष्क्रिय खातों को सक्रिय करते समय द्वितीय स्तर की सत्यापन प्रक्रिया अनिवार्य की जाए। साथ ही, ई-केवाईसी प्रक्रियाओं को पूरी तरह डिजिटल और सुरक्षित प्रणाली में करने की योजना पर काम शुरू कर दिया गया है।
यह मामला कानपुर में बैंकिंग सिस्टम की लापरवाही का एक बड़ा उदाहरण बन गया है, जहां आंतरिक निगरानी की कमी और प्रक्रियागत चूक के चलते लाखों रुपये का हेरफेर संभव हुआ। फिलहाल, विजिलेंस जांच जारी है और बैंक प्रशासन का कहना है कि दोषी पाए जाने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।