तीन दिन की नोटिस, जवाब के नाम पर सन्नाटा — व्यावसायिक सीएससी अधिकारी डॉ. यूबी सिंह को भी गुमराह करने का आरोप।
रिपोर्ट — मनीष गुप्ता, कानपुर
– मामला और गंभीर — विभाग चुप, गुमराहियाँ बढ़ी
बिधनू सीएचसी के ₹25,000 वसूली के आरोप में नया मोड़ सामने आया है। अब आरोप यह भी है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से न केवल कार्रवाई के लिये अंतराल बढ़ाया गया, बल्कि व्यावसायिक सीएससी अधिकारी (डॉ. यू.बी सिंह) को भी गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। साथ ही, कई पत्रकारों के साथ भी सूचना छेड़छाड़ कर उन्हें भटकाने के इरादे के संकेत मिल रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, वसूली कथित रूप से एक डॉक्टर से हुई थी, लेकिन विभागीय नोटिस में किसी और झोलाछाप डॉक्टर का नाम दर्ज कर दिया गया — ताकि फाइल पर औपचारिकता पूरी दिखे और असली पहलू रहस्यमयी बने रहें।
– तीन दिन की नोटिस — आठ दिन की चुप्पी
मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय ने इस मामले पर तीन दिन में स्पष्टीकरण देने को कहा था। पर जब पत्रकार ने अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. यूबी सिंह (व्यावसायिक सीएससी अधिकारी के रूप में नामित) से संपर्क किया, तो बताया गया कि बिधनू सीएचसी अधिकारी ने सात दिन का समय मांगा था।
अब आठ दिन बीत चुके हैं — स्वास्थ्य विभाग से न तो कोई औपचारिक जवाब आया है, न किसी प्रकार की स्पष्ट कार्रवाई दिखाई दी। यही नहीं, विभाग की ओर से सूचना-प्रवाह में अनिश्चितता और गलत रिले किए जाने की शिकायतें बढ़ती जा रही हैं।
-किसे और किसने गुमराह किया? — पत्रकार भी निशाने पर
विभागीय सूत्रों का कहना है कि जिनसे सवाल किए जाने थे, वे “संपर्क से बाहर” हैं।
जिनसे पूछताछ अपेक्षित थी, वे “मीटिंग में व्यस्त” बताए जा रहे हैं।
कुछ पत्रकारों का दावा है कि उन्हें भी जानबूझकर भ्रामक जानकारी दी गई ताकि केस की सच्चाई दब जाए या दिशा बदल जाए।
वहीं, डॉ. यूबी सिंह के साथ भी ऐसा व्यवहार करने की बात सामने आई है — सूत्र कहते हैं कि उन्हें भी मामले की असलियत से दूर रखा गया और गलत दिशानिर्देश दिए गए।
इन हालातों के बीच कई लोगों का मानना है कि मामला “कागजी कार्रवाई” बनाकर शांत कर दिया गया है, जबकि असली चरम पर आज भी रहस्यमयी सन्नाटा है।
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📄 जनता और प्रेस के लिये उठ रहे सवाल
यदि वसूली नहीं हुई, तो विभागी चुप्पी और गुमराह करने के तर्क क्या हैं?
यदि सब कुछ सही है, तो पत्रकारों और संबंधित अधिकारियों को गुमराह क्यों किया गया?
नोटिस में किसके निर्देश पर नाम परिवर्तन हुआ — और किस वजह से असली कथित आरोपी फाइल से गायब रह गए?
अब क्या होना चाहिए
1. तत्काल पारदर्शी स्पष्टीकरण: स्वास्थ्य विभाग को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट वक्तव्य देना चाहिए — किस आधार पर नोटिस में नाम बदला गया और अभी तक जवाब क्यों नहीं आया।
2. न्यायिक/विभागीय जांच: यदि गुमराह करने का गंभीर आरोप है तो स्वतंत्र जांच की मांग उठनी चाहिए।
3. पत्रकारों के साथ पारदर्शिता: मीडिया को सही दस्तावेज़ व जानकारी उपलब्ध कराकर अफवाहों से बचाया जाना चाहिए।
4. डॉ. यू.बी सिंह का बयान लें: ताकि स्पष्ट हो कि उन्हें किस तरह की जानकारी दी गई और क्या उन्हें सचमुच भटकाया गया।
स्वास्थ्य विभाग की मौन नीति और सूचना के साथ छेड़छाड़ के आरोपों ने मामला और जटिल कर दिया है। जब गलियारे में “जुगाड़” और “मीटिंग” की बातें चल रही हों और आधिकारिक जवाब गायब हों — तो जनता और प्रेस के पास सवाल बढ़ते हैं।
हमने विभाग और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है; पर वर्तमान स्थिति में विभाग की ओर से कोई संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं मिली।