जीएसटी के नये स्लैब से ईंट भट्ठा व्यापारियों के ज़ख्मों पर लग रहा जले पर नमक

कानपुर- कानपुर ब्रिक क्लिन ओनर्स एसोसिएशन द्वारा अपनी मांगों को लेकर प्रेस वार्ता का आयोजन हुआ जाने के जिसमें संगठन के पदाधिकारी द्वारा बताया गया कि मानव जीवन की तीन मूलभूत आवश्यकता रोटी, कपड़ा और मकान तीनों की पूर्ति का ईंट प्रमुख घटक है, परन्तु सरकार को जनहित से कोई सरोकार नहीं है यह इस बात से साबित है कि दिनांक 03 सितम्बर, 2025 को नई दिल्ली में सम्पन्न जीएसटी काउंसिल 56वीं मीटिंग में ईंटों पर जीएसटी दर न घटाने के निर्णय से लाल ईंट निर्माताओ में नाराजगी है आप सभी को अवगत कराना है कि वर्ष 2017 में जीएसटी काउसिंल द्वारा ईंट निमार्ताओ पर लागू कम्पोजीशन स्कीम को मार्च 2022 में समाप्त करके 01% के स्थान पर 06 % व आईटीसी लेने पर 05% के स्थान पर 12 % कर थोपा गया था तभी से व्यापारी जी.एस.टी. दर को कम करने की माँग कर रहे थे तथा सरकार से वैट के समय लागू समाधान योजना की तरह जीएसटी में भी समाधान योजना की माँग कर रहे थे परन्तु भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 15 अगस्त को की गई घोषणा के क्रम में जीएसटी. काउसिंल द्वारा 56वीं मीटिंग में लाल ईंट निर्माताओं पर न तो टैक्स घटाया गया और न ही समाधान योजना का विकल्प दिया गया जबकि सीमेंट पर जीएसटी दर में 28% से 18% की कमी की गई तथा दैनिक समाचार पत्रों के माध्यम से जानकारी मिली कि 12 % का स्लैब जीएसटी काउंसिंल द्वारा समाप्त कर दिया गया है परन्तु बड़े खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि जी.एस.टी. काउंसिंल द्वारा एक तरफ 12 % कर दर को समाप्त करने की घोषणा की गई है। परन्तु लाल ईंट निर्माताओं पर 12 % का टैक्स रेट अभी भी लागू है यह जानकारी आज प्रेस वार्ता में एसोसिएशन के अध्यक्ष गोपी श्रीवास्तव ने दी वार्ता को सम्बोधित करते हुए एसोसिएशन के महामंत्री घनश्याम दास छाबड़ा ने कहा कि जीएसटी काउंसिल ने ईंटों पर कर दर न घटाकर सीधे जनहित की अनदेखी कर जले पर नमक डालने का कार्य किया है परंतु सरकार ने हमारी पीड़ा को अनदेखा कर जीएसटी काउंसिल के माध्यम से ईंटों पर कर दर न घटाकर भारी कुठाराघात किया है, साथ ही यह भी कहा कि ईंटों पर कर दर में 06 % व 12 % का हम पुरजोर विरोध करते हैं वार्ता के दौरान महामंत्री घनश्याम दास छावड़ा ने जानकारी दी कि ईंट भट्ठा उद्योग एक सीजनल ग्रामीण कुटीर उद्योग है जिसमें खेती किसानी से बचे समय में स्थानीय स्तर पर ग्राम वासी भट्ठे पर अधिक संख्या में रोजगार पाते है जिससे शहरी पलायन भी रूकता है।

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