खुले में बायो-मेडिकल वेस्ट और कूड़े की समस्या पर नगर निगम की गंभीर बैठक

कानपुर नगर निगम। आज दिनांक 27.08.2025 को मध्यान्ह 12:30 बजे नगर निगम मुख्यालय स्थित समिति कक्ष में महापौर एवं नगर आयुक्त की संयुक्त अध्यक्षता में विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित हैलट, उर्सला, कांशीराम अस्पतालों में कूड़ा व बायो-मेडिकल वेस्ट खुले में पड़े होने की खबरों पर बैठक आयोजित की गई।

बैठक में महापौर ने पूछा कि शहर के सभी अस्पताल अपने परिसर के कूड़े का निस्तारण किस संस्था को देते हैं और बायो-वेस्ट का निस्तारण कैसे किया जाता है। उन्होंने कहा कि शहर में कई नर्सिंग होम अपना बायो-वेस्ट खुले में फेंक रहे हैं, जबकि अस्पताल परिसर की सफाई की जिम्मेदारी संबंधित अस्पताल की होती है। जे.के. कैंसर अस्पताल में कैंसर जैसी घातक बीमारी का बायो-वेस्ट खुले में पड़ा होने की छायाचित्र पर महापौर ने गंभीर नाराजगी जताई।

महापौर ने कहा कि खुले में बायो-वेस्ट फेंकने वाले अस्पतालों पर मुकदमा दर्ज कराई जाएगी। नर्सिंग होम मरीजों से लाखों रुपए वसूलते हैं, लेकिन बायो-वेस्ट खुले में फेंकते हैं। बैठक में उपस्थित एसीएमओ आर.पी. मिश्रा द्वारा नर्सिंग होम से संबंधित जानकारी न देने पर नाराजगी जताई गई और पूछा कि सीएमओ क्यों नहीं आए, जिससे बैठक का कोई औचित्य नहीं है। महापौर ने कहा कि सीएमओ के आने के बाद ही बैठक होगी।

नगर आयुक्त सुधीर कुमार ने कहा कि अस्पताल परिसर के अन्दर सफाई व्यवस्था बेहद खराब है, डस्टबिन की व्यवस्था नहीं है और हैलट की स्थिति चिन्ताजनक है।

एलएलआर हॉस्पिटल के सीएमएस डॉ. एन.सी. त्रिपाठी ने बताया कि जनरल कूड़ा दीक्षान्त कंपनी उठाती है, जिसका प्रतिमाह 30 हजार का भुगतान होता है, और बायो-वेस्ट का निस्तारण एमपीसीसी द्वारा किया जाता है।

महापौर द्वारा बायो-मेडिकल वेस्ट निस्तारण कंपनियों के बारे में पूछे जाने पर क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी अजीत कुमार सुमन ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा एमपीसीसी एवं विलवर्ड दो कंपनियों को बायो-वेस्ट निस्तारण के लिए पंजीकृत किया गया है और पंजीकरण केवल एक बार होता है।

नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अमित सिंह ने कहा कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स-2016 के अनुसार किसी कंपनी को नगर निगम से एनओसी लेने के बाद ही शहर के अस्पतालों से बायो-वेस्ट ले सकती है, लेकिन वर्ष 2015 में एमपीसीसी को नगर निगम द्वारा कोई एनओसी नहीं दी गई थी और बिलवर्ड 2010 से ब्लैकलिस्टेड होने के बावजूद बायो-वेस्ट का निस्तारण कर रही है।

महापौर द्वारा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कार्रवाई के निर्देश दिए जाने पर अजीत कुमार सुमन ने कहा कि एमपीसीसी और बिलवर्ड द्वारा नगर निगम से एनओसी न लिए जाने पर कार्रवाई/नोटिस नगर निगम द्वारा की जाएगी, जिसे प्रदूषण बोर्ड संज्ञान में लेकर आगे कार्रवाई करेगा। एमपीसीसी कंपनी पर पर्यावरण प्रदूषण हेतु 1 करोड़ रुपये का अर्थदंड लगाया गया है।

महापौर ने सीएमओ हरिदत्त नेमी से शहर के नर्सिंग होमों की सूची उपलब्ध कराने को कहा। उन्होंने बताया कि कई नर्सिंग होम केवल दो- दो कमरों में चल रहे हैं, और उनका रजिस्ट्रेशन किस प्रकार होता है। इस वर्ष भारी बरसात के कारण कूड़ा सड़ रहा है, जिससे बीमारियाँ फैलने की आशंका है, अतः एंटीलार्वा का छिड़काव आवश्यक है।

सीएमओ हरिदत्त नेमी ने कहा कि बैठक के बिंदु की जानकारी नहीं थी, इसलिए नर्सिंग होमों की सूची साथ नहीं लायी गई। नर्सिंग होम का रजिस्ट्रेशन फायर, प्रदूषण की एनओसी और बायो-वेस्ट एग्रीमेंट के आधार पर किया जाता है। सभी पंजीकृत नर्सिंग होम की सूची उपलब्ध कराई जाएगी।

महापौर ने निर्देश दिया कि एंटीलार्वा के छिड़काव के लिए पार्षदों के साथ बैठक कराई जाएगी। महापौर ने सीएमओ, एलएलआर हॉस्पिटल और जे.के. कैंसर अस्पताल के अधिकारियों को निर्देशित किया कि अपने अस्पताल परिसर में एक बंद कूड़ाघर बनवाएं और खुले में कोई कूड़ा न पड़े, ताकि एक निश्चित स्थान से कूड़ा उठाया जा सके।

बैठक में मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनमोहन आर्या, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अजय संख्वार, जे.के. कैंसर अस्पताल एएमओ डॉ. प्रमोद कुमार सिंह, सीएमएस कांशीराम अस्पताल डॉ. नवीन चंद्र सक्सेना सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।

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