मनीष गुप्ता
कानपुर।
दिव्यांगता को लेकर प्रचलित भेदभावपूर्ण सोच को उस समय झटका लगा, जब जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह के सख़्त हस्तक्षेप ने एक होनहार छात्रा को उसके शिक्षा का हक दिलाया। यह घटना तब घटी जब एक निजी विश्वविद्यालय ने व्हीलचेयर पर आने के कारण श्रेया शुक्ला को एलएलएम में दाख़िला देने से मना कर दिया। श्रेय की पिता, एल.के. शुक्ल (एडवोकेट), ने 30 जुलाई को जनता दर्शन में जिलाधिकारी से इस भेदभाव की शिकायत की जिलाधिकारी ने इस मामले को गंभीरता से लिया और एसडीएम को विश्वविद्यालय प्रशासन से बात करने के निर्देश दिए। इसके बाद विश्वविद्यालय ने 1 अगस्त को इंट्रेंस टेस्ट आयोजित किया, जिसे श्रेया ने अच्छे अंक हासिल किए और उन्हें दाख़िला दिया गया। श्रेया और उनके पिता ने जिलाधिकारी का आभार जताते हुए कहा कि प्रशासन की तत्परता ने उनकी बेटी का शैक्षणिक साल बचा लिया। जिलाधिकारी ने कहा कि दिव्यांग छात्रों को शिक्षा से वंचित करना कानून के खिलाफ है और प्रशासन किसी भी भेदभावपूर्ण निर्णय के खिलाफ सख़्त कार्रवाई करेगा।
व्हीलचेयर से मुस्कुराई ज़िंदगी जिलाधिकारी के हस्ताक्षेप से मिला शिक्षा का हक