न्यायार्जित धन से प्राप्त आहार होता है शान्तिप्रद – आचार्य

*आहार का है जीवन में विशेष महत्व – आचार्य अभिषेक*

*धर्मशास्त्रोक्त विधि से सम्पन्न करने चाहिए संस्कार -आचार्य*

कानपुर ।
बाबा महाकालेश्वर मन्दिर के छब्बीसवें वार्षिकोत्सव पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के षष्ठम दिवस पर आचार्य अभिषेक शुक्ल जी ने कहा कि भगवान् श्रीकृष्ण को विप्रपत्नियों ने चतुर्विध (चोष्य,चर्व्य,पेय और लेह्य)भोजन प्रदान किया,वैदिकधर्म में आहार का विशेष महत्त्व है,जिस प्रकार का आहार ग्रहण किया जाता है,उस प्रकार की बुद्धि होती है,अतः मनुष्य को आपत्काल में भी,जीवनरक्षार्थ भी यथाशक्ति सात्त्विक आहार ग्रहण करना चाहिए,न्यायार्जित धन से जो आहार प्राप्त होता है वह शान्तिप्रद होता है,रासपंचाध्यायी,उद्धव चरित्र,रुक्मिणी विवाह का वर्णन करते हुए कहा विवाह एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण संस्कार है,जिसे यथासम्भव धर्मशास्त्रोक्त विधि से ही करना चाहिए,इससे दाम्पत्यजीवन अधिक सुखद एवं स्थायी रहता है प्रणय-परिणय आदि में भी शास्त्रीय विधान की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए,धूमधाम के साथ श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाहोत्सव मनाया गया,इस अवसर पर आयोजक . विजयलक्ष्मी शर्मा,दीपा निगम, वीरेंद्र मिश्र, पुष्पा सिंह चौहान, नेहा मिश्रा, राघवेन्द्र मिश्रा, अजित श्रीवास्तव, ममता श्रीवास्तव, अनीता अग्रवाल, निखिल शुक्ल,विनय बाजपेयी,शशिकान्ति.शर्मा…. एवं विविध सम्मानित जन उपस्थित रहे ।

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