कानपुर: जैसे-जैसे देश में तापमान रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच रहा है, वैसे-वैसे एक अदृश्य स्वास्थ्य संकट भी तेज़ी से उभर रहा है—हीट स्ट्रेस और डिहाइड्रेशन के कारण किडनी से जुड़ी समस्याएं आम होती जा रही हैं। गर्मी हमारे गुर्दों को किस प्रकार प्रभावित करती है, यह समझना आज बेहद ज़रूरी हो गया है।
मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा के नेफ्रोलॉजी एवं किडनी ट्रांसप्लांट विभाग के डायरेक्टर डॉ. विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि “जब शरीर अत्यधिक पसीना बहाता है, तो पानी की कमी हो जाती है, जिससे रक्त प्रवाह महत्वपूर्ण अंगों, विशेष रूप से किडनी तक कम पहुंचता है। यदि यह स्थिति बार-बार या लंबे समय तक बनी रहती है, तो किडनी विषैले पदार्थों को बाहर निकालने और शरीर में तरल पदार्थों के संतुलन को बनाए रखने में असमर्थ हो जाती है। इससे अचानक किडनी फेल होने की स्थिति—एक्यूट किडनी इंजरी हो सकती है, जो समय पर इलाज न मिलने पर स्थायी क्षति का कारण बन सकती है। यदि हीट स्ट्रेस लगातार बना रहे, तो धीरे-धीरे यह स्थिति क्रॉनिक किडनी डिज़ीज (CKD) में बदल सकती है, जो जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करती है और कई मामलों में डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की आवश्यकता पड़ सकती है।“
यह समस्या किसी को भी हो सकती है, लेकिन कुछ लोग विशेष रूप से अधिक खतरे में होते हैं। जैसे खेतों में काम करने वाले किसान या ऐसे लोग जो धूप में लंबे समय तक काम करते हैं, गर्मी में प्रशिक्षण ले रहे एथलीट्स, बुज़ुर्ग जो प्यास महसूस नहीं करते, और मधुमेह या हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित व्यक्ति—इन सभी में किडनी पर पहले से ही तनाव होता है, जिससे जोखिम बढ़ जाता है।
किडनी की परेशानी के संकेत हमेशा स्पष्ट नहीं होते, लेकिन कुछ चेतावनी संकेतों को नजरअंदाज़ नहीं करना चाहिए—जैसे सामान्य से कम यूरिन आना, चेहरे या पैरों में सूजन, लगातार थकान रहना, चक्कर आना या बेहोशी, और यूरिन का गहरा पीला रंग।
डॉ. विजय ने आगे बताया कि “सौभाग्यवश, किडनी की समस्याओं को शुरुआती चरण में ही पहचानना संभव है। इसके लिए सीरम क्रिएटिनिन और बीयूएन जैसे रक्त परीक्षण, पेशाब में प्रोटीन या रक्त की जांच, और किडनी की संरचना जानने के लिए अल्ट्रासाउंड स्कैन कराए जा सकते हैं। ये परीक्षण लक्षणों के गंभीर होने से पहले ही समस्या को पकड़ सकते हैं। गर्मी से जुड़ी किडनी समस्याओं को रोका जा सकता है—इसके लिए नियमित रूप से पानी पीना जरूरी है, भले ही प्यास न लग रही हो। दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक धूप से बचें, ठंडी या छायादार जगहों पर रुक-रुक कर आराम करें, हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें और अपने यूरिन के रंग पर ध्यान दें—यदि रंग गहरा पीला है, तो यह शरीर में पानी की कमी का संकेत है।“
यदि आप या आपके आस-पास कोई व्यक्ति ज़्यादा डिहाइड्रेट हो गया हो या किडनी से संबंधित लक्षण दिखा रहा हो, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें। ऐसे मामलों में आईवी फ्लूइड्स, इलेक्ट्रोलाइट संतुलन को ठीक करना या अस्थायी डायलिसिस की आवश्यकता हो सकती है।
इसलिए सतर्क रहें और समय पर कदम उठाएं। यदि आप किसी जोखिम समूह में आते हैं या लक्षण महसूस कर रहे हैं, तो बिना देर किए नेफ्रोलॉजिस्ट से संपर्क करें। त्वरित कार्रवाई ही इस समस्या से बचाव और आपकी किडनी को स्वस्थ रखने की कुंजी है।