कानपुर। गणेश महोत्सव के तीसरे दिन गुरुवार को शहर पूरी तरह गणेशमय नजर आया। शहर के बड़े पंडालों में सुबह से ही दर्शन के लिए भक्तों की कतार लगी रही। गुमटी, श्याम नगर, किदवई नगर, स्वरूप नगर और बर्रा के प्रमुख पंडालों में आकर्षक झांकियां सजाई गई हैं।
तीन दिन बीत जाने के बाद भी भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ है। शाम होते ही आरती में ढोल-ताशा और शंखनाद से पूरा माहौल भक्तिमय हो रहा है। कई जगहों पर तो आरती के दौरान भावुक पल भी देखने को मिल रहे हैं। भक्तों का कहना है कि बप्पा घर के सदस्य जैसे लगने लगे हैं और अब विदाई के बारे में सोचकर ही मन भर आता है।
बढ़ी मिट्टी के गणेश की मांग
इस बार बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मूर्तिकारों के अनुसार इस साल प्लास्टर ऑफ पेरिस की तुलना में मिट्टी के गणेश जी की मांग 40 प्रतिशत तक बढ़ी है। गुमटी के मूर्तिकार रमेश प्रजापति ने बताया कि लोग अब जागरूक हो रहे हैं। भले ही मिट्टी की मूर्ति 500 रुपये महंगी है, लेकिन लोग पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए वही ले रहे हैं।
युवाओं की टोली संभाल रही व्यवस्था
हर पंडाल में सबसे खास बात युवाओं की भागीदारी है। कॉलेज और कोचिंग से लौटकर युवा रात तक पंडाल की व्यवस्था, भोग और सुरक्षा संभाल रहे हैं। किदवई नगर के एक पंडाल में तो पूरा प्रबंधन ही इंटर कॉलेज के छात्रों ने संभाल रखा है। DJ की जगह अब ढोल-ताशा पथक आकर्षण का केंद्र बने हैं।
10 दिन का साथ, फिर सूनापन
गणेश जी को घर में लाने वाले परिवारों में अलग ही रौनक है। बर्रा में रहने वाली सुनीता गुप्ता ने बताया कि उनके 8 साल के बेटे ने तो अपना छोटा सा स्कूल बैग भी बप्पा के पास रख दिया है, ताकि बप्पा कहीं जाएं नहीं। ऐसे कई घरों में बच्चे बप्पा से बातें करते हुए दिख रहे हैं। यही इस त्योहार की सबसे खूबसूरत बात है। त्योहार के चलते फूल, माला, मिठाई और सजावट के बाजार में भी तेजी आई है।