विभाजन का दर्द भुलाना संभव नहीं : प्रतिभा शुक्ला

विभाजन की पीड़ा भुलाना संभव नहीं, विस्थापित परिवारों का संघर्ष देश के लिए प्रेरणा : प्रतिभा शुक्ला

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर शहीदों को श्रद्धांजलि, प्रभावित परिवारों के सदस्यों को किया गया सम्मानित

कानपुर नगर। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर शुक्रवार को छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के वीरांगना लक्ष्मीबाई प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यक्रम में वर्ष 1947 के विभाजन की त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी गई। साथ ही विभाजन के दौरान विस्थापन का दर्द झेलने वाले परिवारों के संघर्ष, त्याग और साहस को याद किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रदेश सरकार की बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की राज्य मंत्री प्रतिभा शुक्ला रहीं। इस मौके पर विधायक सुरेंद्र मैथानी, विधायक नीलिमा कटियार, विधान परिषद सदस्य अरुण पाठक, जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह और मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जे जैन मौजूद रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि सहित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों द्वारा वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन करने के साथ हुई। इसके बाद सभी ने राजकीय अभिलेखागार द्वारा संरक्षित दुर्लभ ऐतिहासिक चित्रों और अभिलेखों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। कार्यक्रम में विभाजन की त्रासदी पर आधारित लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई, जिसमें लाखों लोगों के विस्थापन, पलायन के दौरान झेली गई कठिनाइयों और मानवीय पीड़ा को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया।

प्रदर्शनी में देश के विभाजन में मुस्लिम लीग और तत्कालीन ब्रिटिश सरकार की भूमिका से जुड़े ऐतिहासिक अभिलेखों को प्रदर्शित किया गया। इसके साथ ही नोआखली और कलकत्ता में हुए सांप्रदायिक दंगों की भयावहता को भी दुर्लभ चित्रों के माध्यम से सामने रखा गया। दंगों में प्रभावित परिवारों की त्रासदी, घर-बार छोड़कर अनजान रास्तों पर निकलने को मजबूर शरणार्थियों की बेबसी और तत्कालीन समाचार पत्रों में प्रकाशित हृदयविदारक तस्वीरों ने उस दौर की पीड़ा को जीवंत कर दिया। प्रदर्शनी में लगे चित्रों को देखकर कई लोग भावुक हो उठे। स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी पुस्तकों की प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रही।

वर्ष 1947 का विभाजन मानव इतिहास की सबसे बड़ी विस्थापन त्रासदियों में गिना जाता है। विभाजन के कारण करीब छह मिलियन यानी 60 लाख गैर-मुस्लिम आबादी को अपना घर-बार छोड़कर भारत आना पड़ा। इस दौरान लोगों ने पलायन की पीड़ादायक यात्रा में अनेक कठिनाइयों और अमानवीय परिस्थितियों का सामना किया। बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी जान गंवाई। विभाजन केवल देश की सीमाओं के बंटवारे तक सीमित नहीं था, बल्कि इससे असंख्य परिवारों के रिश्ते टूटे, घर उजड़े और लोगों की स्मृतियां हमेशा के लिए दर्द से जुड़ गईं।

दर्दनाक इतिहास से सीख लेकर एकता मजबूत करने की जरूरत

मुख्य अतिथि प्रतिभा शुक्ला ने कहा कि विभाजन का दर्द कभी भुलाया नहीं जा सकता। देश का विभाजन केवल भूभाग का बंटवारा नहीं था, बल्कि इसने असंख्य परिवारों को उनकी जड़ों, घरों और अपनों से दूर कर दिया। विभाजन की पीड़ा सहने वाले लोगों ने जिस धैर्य, साहस और परिश्रम के साथ नए सिरे से जीवन शुरू किया, वह पूरे देश के लिए प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि इतिहास के इस पीड़ादायक अध्याय से सीख लेते हुए सामाजिक सद्भाव, आपसी भाईचारे और राष्ट्रीय एकता को और मजबूत करना होगा।

विधायक सुरेंद्र मैथानी ने कहा कि विभाजन की त्रासदी में लाखों लोगों ने असहनीय कष्ट झेले। उनके त्याग, संघर्ष और साहस को याद करना प्रत्येक भारतीय का दायित्व है। विधायक नीलिमा कटियार ने कहा कि नई पीढ़ी को विभाजन की वास्तविकता और उससे जुड़ी मानवीय पीड़ा के बारे में जानकारी देना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां इतिहास से सीख लेकर सामाजिक सद्भाव और एकता को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ें।

विधान परिषद सदस्य अरुण पाठक ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस उन असंख्य लोगों के संघर्ष और बलिदान को नमन करने का अवसर है, जिन्होंने विभाजन के दौरान अपना सब कुछ खो दिया। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी और नए भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि विभाजन की विभीषिका भारतीय इतिहास का अत्यंत पीड़ादायक अध्याय है। नई पीढ़ी को इस इतिहास से अवगत कराने के साथ ही समाज को हमेशा सजग रहना चाहिए, ताकि ऐसी त्रासदी दोबारा न हो और इतिहास स्वयं को न दोहराए। मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जे जैन ने कहा कि विभाजन की त्रासदी को याद करने का उद्देश्य केवल अतीत की पीड़ा को दोहराना नहीं, बल्कि उससे सीख लेकर आपसी सद्भाव, संवेदनशीलता और एकता के मूल्यों को मजबूत करना है।

विस्थापन का दर्द सहकर नए भारत के निर्माण में दिया योगदान

कार्यक्रम में विभाजन विभीषिका से प्रभावित परिवार से जुड़े महेश मेघानी ने अपने अनुभव और परिवार से जुड़ी स्मृतियां साझा कीं। उन्होंने बताया कि विभाजन के समय उनके परिवार को भी अनेक कठिन परिस्थितियों से गुजरना पड़ा। घर-बार छोड़ने के बाद परिवार ने परिश्रम, साहस और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर भारत में अपने जीवन को दोबारा खड़ा किया। उन्होंने कहा कि विस्थापित परिवारों की नई पीढ़ी आज देश की प्रगति में विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

सरदार हरविंदर सिंह लॉर्ड ने कहा कि भारत का विभाजन इतिहास की अत्यंत दुखद घटनाओं में से एक है। इस त्रासदी में लाखों परिवारों ने घर, संपत्ति और अपनों को खोया। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद विस्थापित परिवारों ने हिम्मत नहीं हारी और मेहनत के दम पर अपना जीवन फिर से संवारते हुए देश की प्रगति में भागीदारी निभाई।

प्रभावित परिवारों के परिजन हुए सम्मानित

कार्यक्रम के दौरान विभाजन की विभीषिका से प्रभावित परिवारों के सदस्यों को सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि और जनप्रतिनिधियों ने सरदार हरविंदर सिंह लॉर्ड, बाबा मोहन सिंह, गुरमीत सिंह, महेश मेघानी, लक्ष्मण दास अमरनानी, नरेश टेकवानी, दिलीप बालानी, कुलदीप पारवानी, मनोहर शादीजा, खूबचंद खट्टर और किसन जागरणी सहित अन्य लोगों को सम्मानित किया। इस दौरान विभाजन की पीड़ा झेलने के बाद विपरीत परिस्थितियों में नए सिरे से जीवन खड़ा करने वाले परिवारों के संघर्ष, त्याग और साहस को नमन किया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

नमस्कार,J news India में आपका हार्दिक अभिनंदन हैं, यहां आपकों 24×7 के तर्ज पर पल-पल की अपडेट खबरों की जानकारी से रूबरू कराया जाएगा,खबर और विज्ञापन के लिए संपर्क करें- +91 9044953076,हमारे यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें साथ ही फेसबुक पेज को लाइक अवश्य करें।धन्यवाद