सहायिका ने लगाए मारपीट, उत्पीड़न और शिकायत वापस लेने के दबाव के आरोप, सीडीपीओ की रिपोर्ट डीपीओ को भेजी
कानपुर। बिधनू विकास खंड की ग्राम पंचायत पतेहुरी स्थित आंगनबाड़ी केंद्र का विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। केंद्र में कार्यरत आंगनबाड़ी सहायिका मुन्नी देवी ने कार्यकत्री मिथिलेश कुमारी और उनके परिजनों पर शारीरिक एवं मानसिक उत्पीड़न, मारपीट, अभद्र व्यवहार और शिकायत वापस लेने का दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले की शिकायत पनकी थाने के साथ ही जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) को भी दी गई है। शिकायत सामने आने के बाद बाल विकास विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है।
मुन्नी देवी का आरोप है कि 9 जुलाई को आंगनबाड़ी केंद्र पर हुए विवाद के दौरान उनके साथ गाली-गलौज की गई, मारपीट की गई और गला दबाने का प्रयास किया गया। उनका कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई बार उनके साथ अभद्र व्यवहार, मानसिक उत्पीड़न और धमकी की घटनाएं हो चुकी हैं। कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें प्रशासन की शरण लेनी पड़ी।
शिकायत मिलने के बाद बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) रत्ना श्रीवास्तव स्वयं आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचीं। उन्होंने दोनों पक्षों से अलग-अलग बातचीत की और मौके पर मौजूद ग्रामीणों के भी बयान दर्ज किए। जांच के दौरान कुछ ग्रामीणों ने भी सहायिका के साथ अभद्र व्यवहार और मारपीट होने की बात कही। जांच पूरी करने के बाद सीडीपीओ ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट जिला कार्यक्रम अधिकारी को भेज दी है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मामले ने गांव में भी चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्राम प्रधान शिव प्रताप ने भी जिला कार्यक्रम अधिकारी को पत्र भेजकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के पोषण एवं स्वास्थ्य से जुड़ी महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं का केंद्र है। ऐसे में केंद्र पर लगातार विवाद और तनाव का माहौल सरकारी योजनाओं के संचालन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
सहायिका मुन्नी देवी ने यह भी आरोप लगाया है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद उन पर लगातार शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि उन्हें समझौता करने के लिए धमकाया जा रहा है। इस संबंध में उन्होंने ग्राम प्रधान को भी जानकारी दी है। ग्राम प्रधान ने प्रशासन से पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बनाने के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
इस पूरे मामले पर जिला कार्यक्रम अधिकारी प्रीति सिन्हा ने कहा कि शिकायत प्राप्त होने के बाद प्रकरण को गंभीरता से लिया गया है। सीडीपीओ की जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद सभी तथ्यों का परीक्षण किया जाएगा। जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराई जाएगी तथा जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर शासन की निर्धारित नियमावली के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जांच में यदि कोई भी दोषी पाया जाता है तो उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
अब इस मामले में विभागीय जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। यदि शिकायतों की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।