नर्सिंग होम संचालकों से कथित उगाही, निजी कारोबार को बढ़ावा देने और सरकारी आवास पर कब्जे तक के आरोप; जांच हुई तो खुल सकते हैं कई राज
कानपुर। स्वास्थ्य विभाग में तैनात एक आउटसोर्सिंग कर्मचारी इन दिनों गंभीर आरोपों के घेरे में है। सूत्रों के अनुसार, विभाग के कई महत्वपूर्ण कामों में उसका इतना हस्तक्षेप है कि बिना उसकी मर्जी के नर्सिंग होम से जुड़े कई प्रकरण आगे नहीं बढ़ते।
आरोप है कि ऑनलाइन नर्सिंग होम पंजीकरण के लिए आने वाले आवेदनों को कथित तौर पर जानबूझकर निरस्त किया जाता है और बाद में संबंधित अस्पताल संचालकों पर समझौते का दबाव बनाया जाता है। कई संचालकों का आरोप है कि कार्रवाई का डर दिखाकर उनसे अवैध वसूली की जाती है। सूत्रों का दावा है कि उक्त कर्मचारी का निजी पैथोलॉजी और दवा का कारोबार भी है। आरोप है कि अस्पताल संचालकों को अपने यहां जांच के सैंपल भेजने और दवाएं लेने के लिए मजबूर किया जाता है। इनकार करने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम से कार्रवाई और अस्पताल सील कराने की धमकी देने की बात भी सामने आ रही है।
यह भी आरोप है कि सीएमओ कार्यालय में आने वाली शिकायतें जांच के लिए आगे बढ़ने से पहले ही संबंधित कर्मचारी तक पहुंच जाती हैं। इसके बाद वह कथित रूप से अस्पताल संचालकों को कार्रवाई की जानकारी देकर मोटी रकम वसूलने का प्रयास करता है। सूत्रों के मुताबिक कर्मचारी ने चकेरी एयरपोर्ट क्षेत्र के पास जमीन भी खरीदी है और भविष्य में अस्पताल खोलने की तैयारी कर रहा है। चर्चा है कि इसी उद्देश्य से बड़े पैमाने पर धन जुटाने की कोशिश की जा रही है। कर्मचारी पर सरकारी आवास पर कब्जा करने का भी आरोप है। सूत्रों का कहना है कि आवास खाली करने के निर्देशों के बावजूद राजनीतिक संरक्षण के कारण अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी।
यदि इन आरोपों की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाती है तो स्वास्थ्य विभाग में बड़े स्तर पर अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है। फिलहाल इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।इस खबर के साथ बॉक्स आइटम भी लगाया जा सकता है।जांच हुई तो खुल सकते हैं स्वास्थ्य विभाग के कई राज।