CMO कार्यालय के प्राइवेट कर्मचारी उगाही के आरोप, अस्पताल संचालकों को शिकायत का डर दिखाकर करता है सौदेबाजी

सूत्रों का दावा— ऑनलाइन शिकायतों का हवाला देकर बनाता है दबाव, रजिस्ट्रेशन और कार्रवाई के नाम पर वसूली की चर्चा

मनीष गुप्ता

कानपुर। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय में तैनात एक प्राईवेट कर्मचारी की कार्यशैली को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, उक्त कर्मचारी निजी अस्पतालों, क्लीनिकों और पैथोलॉजी संचालकों को फोन कर या बुलाकर कहता है कि उनके खिलाफ ऑनलाइन शिकायत आई है और कार्रवाई हो सकती है।
सूत्रों का दावा है कि इसके बाद संबंधित संचालकों पर कार्रवाई का डर दिखाकर समझौते का दबाव बनाया जाता है। आरोप है कि रजिस्ट्रेशन, जांच और शिकायत निस्तारण के नाम पर मोटी रकम की मांग की जाती है। इतना ही नहीं, कुछ संचालकों का यह भी कहना है कि उनसे एक विशेष पैथोलॉजी में जांच भेजने का दबाव बनाया जाता है, अन्यथा उनके कार्यों में अड़चन खड़ी करने की बात कही जाती है। यदि ये आरोप सही साबित होते हैं तो यह स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर एक संविदाकर्मी को इतनी शक्ति किसके संरक्षण में मिली है कि वह अस्पताल संचालकों को कार्रवाई का भय दिखाकर कथित तौर पर दबाव बना रहा है।हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यदि किसी अस्पताल संचालक या संबंधित अधिकारी के पास इस संबंध में साक्ष्य हैं, तो जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविकता सामने आएगी। स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की मांग उठ रही है।

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