फोन पर पति से हुई कहासुनी के बाद बिगड़ी मानसिक स्थिति, थाने में मची अफरा-तफरी
कानपुर। घाटमपुर थाने में मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया जब वहां तैनात एक महिला कांस्टेबल ने घरेलू विवाद के बाद आत्मघाती कदम उठा लिया। पति से फोन पर हुई तीखी बहस के बाद महिला कांस्टेबल ने कथित तौर पर चूड़ी को पीसकर खा लिया। कुछ ही देर में उनकी तबीयत बिगड़ने लगी, जिसके बाद साथी पुलिसकर्मियों ने तत्काल उन्हें अस्पताल पहुंचाया। घटना के बाद पूरे थाने में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
जानकारी के अनुसार, महिला कांस्टेबल प्रियंका मंगलवार को घाटमपुर थाने के सीसीटीएनएस (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम) कक्ष में अपनी नियमित ड्यूटी पर तैनात थीं। इसी दौरान उनके मोबाइल फोन पर पति का कॉल आया। बातचीत के दौरान किसी पारिवारिक मुद्दे को लेकर दोनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक विवाद इतना बढ़ गया कि प्रियंका मानसिक रूप से काफी विचलित हो गईं।
बताया जा रहा है कि गुस्से और तनाव में उन्होंने अपनी चूड़ी के टुकड़े कर उन्हें निगल लिया। कुछ समय बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। पेट में तेज दर्द और बेचैनी की शिकायत पर सहकर्मी पुलिसकर्मियों ने तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी और उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) घाटमपुर पहुंचाया। सीएचसी में प्राथमिक उपचार के दौरान डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को गंभीर माना। चिकित्सकों के अनुसार कांच के टुकड़े निगलने से आंतरिक चोट की आशंका थी। इसके चलते उन्हें बेहतर उपचार और विशेषज्ञ चिकित्सकीय निगरानी के लिए कानपुर के जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां उनका इलाज जारी है।
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस विभाग के अधिकारियों ने मामले की जानकारी जुटानी शुरू कर दी। थाना प्रभारी घाटमपुर मनोज सिंह भदौरिया ने बताया कि प्रारंभिक जांच में पति-पत्नी के बीच घरेलू विवाद की बात सामने आई है। महिला कांस्टेबल का उपचार कराया जा रहा है और उनकी हालत पर डॉक्टर लगातार नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि किन परिस्थितियों में महिला कांस्टेबल ने इतना बड़ा कदम उठाया।
घटना के बाद पुलिस विभाग में भी चर्चा का विषय बना हुआ है। सहकर्मी पुलिसकर्मियों का कहना है कि प्रियंका अपने कार्य के प्रति जिम्मेदार थीं, लेकिन पारिवारिक तनाव के कारण वह मानसिक दबाव में थीं। फिलहाल पुलिस अधिकारियों की प्राथमिकता महिला कांस्टेबल का बेहतर इलाज सुनिश्चित करना है।