लखनऊ में 15 मौतों के बाद चेतावनी: कानपुर का यह अस्पताल भी कहीं हादसे का इंतजार तो नहीं

क्रिकेटर उत्कर्ष द्विवेदी ने KDA को सौंपे दस्तावेज, फायर, विद्युत सुरक्षा और भवन मानकों की जांच की मांग

कानपुर। रामा देवी स्थित शिवकटरा क्षेत्र में संचालित निजी मेडिकल सेंटर को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। पेशेवर क्रिकेटर एवं सामाजिक कार्यकर्ता उत्कर्ष द्विवेदी ने कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA) के उपाध्यक्ष को विस्तृत शिकायती पत्र भेजकर अस्पताल भवन की वैधता, अग्नि सुरक्षा, विद्युत सुरक्षा और अन्य अनिवार्य मानकों की जांच कर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उत्कर्ष द्विवेदी का कहना है कि उन्होंने कुछ समय पूर्व भी अस्पताल भवन को लेकर शिकायत की थी, जिस पर KDA अधिकारियों ने संज्ञान लेते हुए अस्पताल प्रबंधन से जवाब मांगा था। आरोप है कि पहली नोटिस का कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, जिसके बाद 11 जून को दूसरी नोटिस जारी कर भवन के बाहर चस्पा की गई। इसके बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि जिस भवन में अस्पताल संचालित किया जा रहा है, वह निर्माण मानकों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल का आईसीयू 8 अप्रैल 2026 को स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई के दौरान सील किया गया था, जो अभी तक सील है। इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन पर विभिन्न नियमों की अनदेखी करने के आरोप लग रहे हैं। शिकायत पत्र में फायर सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। उत्कर्ष द्विवेदी का आरोप है कि अस्पताल को फायर विभाग से प्रमाणपत्र प्राप्त हुआ, जबकि लोक निर्माण विभाग की ओर से आवश्यक एनबीसी (नेशनल बिल्डिंग कोड) संबंधी प्रमाणन उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि किसी अस्पताल, मॉल, कोचिंग संस्थान या अन्य सार्वजनिक भवन को आवश्यक तकनीकी स्वीकृतियों के बिना फायर एनओसी जारी की जाती है तो यह व्यवस्था में गंभीर खामी और जांच का विषय है।उन्होंने आरटीआई के माध्यम से प्राप्त दस्तावेजों का हवाला देते हुए दावा किया कि अस्पताल भवन ने विद्युत सुरक्षा प्रमाणपत्र के लिए भी कभी आवेदन नहीं किया। शिकायतकर्ता का कहना है कि अस्पताल जैसी संवेदनशील संस्थाओं में विद्युत सुरक्षा मानकों का पालन अत्यंत आवश्यक होता है, क्योंकि यहां मरीजों की जान सीधे तौर पर सुरक्षा व्यवस्थाओं पर निर्भर करती है। विद्युत विभाग द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप निरीक्षण और अनुमति के बिना संचालन किसी बड़े हादसे को आमंत्रण दे सकता है। उत्कर्ष द्विवेदी ने अपने पत्र में 22 जून को लखनऊ में हुए दर्दनाक अग्निकांड का भी उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि हालिया हादसे में 15 लोगों की जान चली गई, जिसने एक बार फिर सुरक्षा मानकों की अनदेखी के खतरनाक परिणामों को उजागर कर दिया है। उनका कहना है कि ऐसी घटनाओं से सबक लेते हुए अस्पतालों और सार्वजनिक भवनों की सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता से जांच की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की जनहानि रोकी जा सके। शिकायत में बिठूर स्थित राजा चिकित्सालय में पूर्व में हुई आग की घटना का भी जिक्र किया गया है, जिसमें एक नवजात बच्ची की मौत हो गई थी। शिकायतकर्ता का कहना है कि जब सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जाती है तो उसका खामियाजा आम लोगों को अपनी जान गंवाकर भुगतना पड़ता है। उत्कर्ष द्विवेदी ने KDA उपाध्यक्ष से मांग की है कि अस्पताल भवन की सभी स्वीकृतियों, सुरक्षा प्रमाणपत्रों और निर्माण संबंधी अभिलेखों की गहन जांच कराई जाए। यदि जांच में अनियमितताएं सामने आती हैं तो जनहित और मरीजों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कठोर कार्रवाई की जाए।

पत्रकारिता संबंधी स्पष्टीकरण
उल्लेखनीय है कि समाचार में वर्णित आरोप शिकायतकर्ता उत्कर्ष द्विवेदी द्वारा कानपुर विकास प्राधिकरण को दिए गए शिकायती पत्र और उनके द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों पर आधारित हैं। इन आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों द्वारा की जानी शेष है। अस्पताल प्रबंधन अथवा संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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