पांचवीं मुहर्रम पर अकीदत का सैलाब, शाह बिरादरान और मटरू के अलम के जुलूस में उमड़ा जनसैलाब

कानपुर। शहादत-ए-इमाम हुसैन की याद में पांचवीं मुहर्रम पर रविवार को शहर का माहौल पूरी तरह गम और अकीदत में डूबा नजर आया। तकिया बेकनगंज से शाह बिरादरान (जोगी बिरादरी) के अलम का ऐतिहासिक जुलूस तथा नीली पोश रोड कर्नलगंज से मटरू के अलम का जुलूस बड़े ही अदब, एहतराम और जोश-ओ-खरोश के साथ निकाला गया। दोनों जुलूसों में हजारों अकीदतमंदों ने शिरकत कर कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश किया। वहीं शहर के लगभग पांच हजार इमामबाड़ों में मजलिस-ए-अजा के आयोजन हुए, जहां महिलाओं ने मन्नतें मानकर बच्चों को हरे और लाल कलावे पहनाए तथा इमाम हुसैन का फकीर बनाया। पांचवीं मुहर्रम पर निकला शाह बिरादरान का जुलूस अपनी भव्यता और ऐतिहासिक परंपरा के लिए विशेष पहचान रखता है। लगभग 154 वर्षों से लगातार निकल रहे इस जुलूस का नेतृत्व मोहम्मद आरिफ और अहमद चौधरी ने किया। अहमद चौधरी ने बताया कि यह परंपरा अवध के नवाब वाजिद अली शाह के दौर से चली आ रही है और उनकी बिरादरी आज भी पूरी श्रद्धा के साथ इसे निभा रही है। दोपहर तीन बजे शौकत अली पार्क स्थित तकिया बेकनगंज से शुरू हुआ यह जुलूस कंघी मोहाल, कर्नलगंज, चूड़ी मोहाल, यतीमखाना रोड, दादा मियां चौराहा, पेचबाग, नई सड़क, मूलगंज, कुली बाजार, कोपरगंज, डिप्टी का पड़ाव, बासमंडी, इफ्तिखाराबाद, दलेलपुरवा, टुकनियापुरवा, फहीमाबाद, हलीम कॉलेज, मोहम्मद अली पार्क, नाला रोड और गुलाब घोसी की मस्जिद सहित विभिन्न इलाकों से गुजरता हुआ रात लगभग दस बजे पुराना तकिया कर्नलगंज पहुंचकर संपन्न हुआ।जुलूस में इस वर्ष शाह बिरादरान द्वारा तैयार कराए गए 85 नए अलम और पटके विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। अलमों के पीछे हरे और लाल रंगों से सजे दर्जनों रथ चल रहे थे, जिन पर छोटे-बड़े बच्चे सवार होकर ‘या हुसैन’ और ‘नारे हुसैनी’ के नारों से वातावरण को गूंजायमान कर रहे थे। कई घोड़े भी जुलूस में शामिल रहे, जिन पर अरबी वेशभूषा धारण किए लोग सवार थे। सैकड़ों इस्लामी परचम लहराते हुए अकीदतमंदों की भीड़ कर्बला के शहीदों को याद कर रही थी। जुलूस में शामिल तीन बैंड दल मातमी धुनों के माध्यम से शहीद-ए-कर्बला हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 वफादार साथियों की कुर्बानी को याद कर रहे थे। जुलूस मार्ग पर जगह-जगह लोगों ने स्वागत शिविर लगाए थे। कर्बला के प्यासे शहीदों की याद में चाय, शरबत और ठंडे पानी की सबीलें लगाई गई थीं। कई स्थानों पर पुलाव और जर्दे का तबर्रुक भी वितरित किया गया। घरों की छतों और बालकनियों से महिलाएं और बच्चे अलम तथा ताजियों का दीदार करते दिखाई दिए। शाम चार बजे कर्नलगंज की नीली पोश रोड से मटरू के अलम का जुलूस भी अंजुमन शरियत-ए-रसूल नौजवान कमेटी के तत्वावधान में निकाला गया। जुलूस का नेतृत्व मुन्ने नवाब और पप्पू कुरैशी ने किया। अपने पारंपरिक मार्गों से गुजरते हुए यह जुलूस पुनः नीली पोश रोड पहुंचकर समाप्त हुआ। यहां भी अकीदतमंदों की भारी भीड़ मौजूद रही और लोगों ने पूरे अनुशासन तथा श्रद्धा के साथ जुलूस में भाग लिया। मुहर्रम की पांचवीं तारीख पर शहर के इमामबाड़ों में मजलिसों का सिलसिला भी जारी रहा। मजलिस-ए-अजा के बाद महिलाओं ने बच्चों को मन्नती हरा-लाल कलावा पहनाया और उन्हें इमाम हुसैन का फकीर बनाया। विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित मजलिसों में कर्बला की घटनाओं और अहलेबैत की कुर्बानियों का विस्तार से वर्णन किया गया। मीडिया प्रभारी डॉ. जुल्फिकार अली रिजवी ने बताया कि याद-ए-हुसैन का सिलसिला पहली मुहर्रम से लगातार जारी है। उन्होंने कहा कि हजरत इमाम हुसैन पैगम्बर-ए-इस्लाम के नवासे और जवानाने जन्नत के सरदार हैं। उन्होंने सत्य और न्याय की रक्षा के लिए अपनी जान की कुर्बानी दी, लेकिन अन्याय और अत्याचार के सामने सिर नहीं झुकाया। डॉ. रिजवी ने कहा कि इमाम हुसैन की शहादत पूरी मानवता के लिए सत्य, न्याय और इंसानियत की रक्षा का संदेश देती है। बड़ी कर्बला नवाबगंज में आयोजित मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना अबूजर काजमी ने जनाबे जैनब के पुत्रों औन और मोहम्मद की बहादुरी और शहादत का मार्मिक वर्णन किया। उनके बयान को सुनकर मजलिस में मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। शहर के अन्य इमामबाड़ों और मजलिसों में मौलाना बशीर हैदर, मौलाना इंतेखाब आलम, मुनव्वर हुसैन और फिरोज अब्बास ने भी अपने संबोधनों में कर्बला के संदेश को उजागर किया। इमामबारगाह नवाब बब्बन कर्नलगंज सहित शहर के विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित मजलिसों में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। इस दौरान डॉ. जुल्फिकार अली रिजवी, पप्पू मिर्जा, अली अख्तर रिजवी, मुजीबुल हसन रिजवी, आसिफ अब्बास, रानू नकवी, सैयद कमर मेहदी, जिया मेहदी, मंजर हुसैन, डॉ. अयाज हैदर रिजवी, फुरकान हैदर रिजवी, आसिफ रिजवी, मुंतजिर हसन, एहसान हुसैन, नजरे आलम, ताज मिर्जा, इब्ने हसन जैदी, अफसर हुसैन सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।
पूरे दिन शहर में मुहर्रम की अकीदत, मातम और कर्बला की यादों का माहौल बना रहा। जुलूसों और मजलिसों में उमड़ी भीड़ ने यह साबित कर दिया कि इमाम हुसैन की कुर्बानी आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है और उनका संदेश इंसानियत, न्याय तथा सत्य के लिए संघर्ष की प्रेरणा देता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

नमस्कार,J news India में आपका हार्दिक अभिनंदन हैं, यहां आपकों 24×7 के तर्ज पर पल-पल की अपडेट खबरों की जानकारी से रूबरू कराया जाएगा,खबर और विज्ञापन के लिए संपर्क करें- +91 9044953076,हमारे यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें साथ ही फेसबुक पेज को लाइक अवश्य करें।धन्यवाद