ड्यूटी के साथ अब पूरी होगी डिग्री की पढ़ाई, सैनिकों-सुरक्षाकर्मियों और कर्मचारियों के लिए सीएसजेएमयू ने खोले उच्च शिक्षा के नए द्वार
कानपुर-देश की सीमाओं पर तैनात सैनिकों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में लगे सुरक्षाकर्मियों, सरकारी एवं निजी संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों और तकनीकी विशेषज्ञों के लिए अब उच्च शिक्षा हासिल करना आसान होने जा रहा है। छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) ने द्रोणाचार्य सेंटर फॉर ऑनलाइन एंड डिस्टेंस एजुकेशन (D-CODE) के माध्यम से ऐसी पहल शुरू की है, जिसके जरिए नौकरी और ड्यूटी के साथ-साथ घर बैठे डिग्री प्राप्त की जा सकेगी। विश्वविद्यालय और सिख लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंटल सेंटर फतेहगढ़ के बीच हुए एमओयू के बाद इस योजना को नई गति मिली है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक ने कहा कि राष्ट्र सेवा में लगे हजारों कर्मयोगी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते-करते अक्सर अपने व्यक्तिगत सपनों और उच्च शिक्षा की इच्छा को पीछे छोड़ देते हैं। लगातार ड्यूटी, स्थानांतरण, शिफ्ट आधारित कार्य प्रणाली और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण वे नियमित रूप से कॉलेज जाकर पढ़ाई नहीं कर पाते। ऐसे लोगों के लिए D-CODE एक बड़ा अवसर साबित होगा, जहां वे अपनी नौकरी जारी रखते हुए स्नातक, परास्नातक और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में अध्ययन कर सकेंगे।
उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल सीमाओं की सुरक्षा से नहीं, बल्कि शिक्षा और ज्ञान के विस्तार से भी होता है। यही सोच इस पहल की आधारशिला है। अब ड्यूटी और सपने एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि साथ-साथ चलने वाले साथी बनेंगे। विश्वविद्यालय का उद्देश्य उन कर्मयोगियों तक शिक्षा पहुंचाना है जो वर्षों से अपने परिवार, संस्थान और देश को प्राथमिकता देते आए हैं।
इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि D-CODE के अंतर्गत सैन्य कर्मियों, अग्निवीरों और उनके आश्रितों को विश्वविद्यालय शुल्क में 50 प्रतिशत तक की छूट दी जाएगी। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि उन परिवारों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का प्रतीक है जिनके सदस्य देश सेवा में अपना जीवन समर्पित करते हैं। फीस में छूट मिलने से आर्थिक बाधाएं भी उच्च शिक्षा के रास्ते में बड़ी रुकावट नहीं बन पाएंगी।
ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग (ODL) और ऑनलाइन लर्निंग (OL) प्रणाली के जरिए विद्यार्थी अपने घर, कार्यस्थल या किसी भी स्थान से पढ़ाई कर सकेंगे। इससे रेलवे, बैंकिंग, सार्वजनिक उपक्रमों, HAL, ALIMCO, रक्षा उत्पादन इकाइयों, सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र और निजी कॉर्पोरेट संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों को विशेष लाभ मिलेगा। वे नौकरी छोड़ने या समय की कमी की चिंता किए बिना अपनी पढ़ाई पूरी कर सकेंगे और पदोन्नति तथा बेहतर करियर के अवसर हासिल कर पाएंगे।
सिख लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंटल सेंटर फतेहगढ़ से अब तक 591 शिक्षार्थियों ने D-CODE के विभिन्न कार्यक्रमों में प्रवेश लिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन इसे उच्च शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता और सीखने की मजबूत इच्छा का प्रमाण मान रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि सही अवसर और मार्गदर्शन मिले तो राष्ट्र सेवा में लगे जवान शिक्षा के क्षेत्र में भी नई उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।
D-CODE के निदेशक डॉ. सरोज द्विवेदी ने बताया कि आने वाले समय में केंद्र के माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), वेब डेवलपमेंट, कंप्यूटर एवं सूचना प्रौद्योगिकी, ड्रोन प्रशिक्षण और साइबर सुरक्षा जागरूकता जैसे रोजगारपरक प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम भी शुरू किए जाएंगे। इससे विद्यार्थियों को केवल डिग्री ही नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीकी कौशल भी प्राप्त होंगे, जो उन्हें बदलते समय के अनुसार रोजगार और करियर में आगे बढ़ने में मदद करेंगे। वहीं D-CODE के सहायक निदेशक डॉ. विमल सिंह ने कहा कि यह पहल केवल एक शैक्षणिक समझौता नहीं, बल्कि उन हजारों कर्मयोगियों के सपनों को नई उड़ान देने का प्रयास है, जिन्होंने वर्षों तक अपनी जिम्मेदारियों को प्राथमिकता दी। अब यही लोग शिक्षा के माध्यम से अपने ज्ञान, व्यक्तित्व और करियर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकेंगे।