कानपुर।
कानपुर कमिश्नरेट के महाराजपुर थाना क्षेत्र से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां देश की सुरक्षा में तैनात एक सीआरपीएफ जवान का परिवार खुद अपने ही घर में असुरक्षित महसूस कर रहा है। पीड़ित महिला ने पड़ोस में रहने वाले एक युवक पर घर में घुसकर अभद्रता करने, गाली-गलौज, पथराव और जान से मारने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। लगातार शिकायतों के बावजूद स्थानीय पुलिस द्वारा ठोस कार्रवाई न किए जाने से परेशान महिला ने अब पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचकर न्याय और सुरक्षा की गुहार लगाई है। पीड़िता के अनुसार उसके पति केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में जवान हैं और वर्तमान समय में झारखंड में तैनात होकर देश सेवा कर रहे हैं। पति की गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर पड़ोस में रहने वाला युवक गोल्डन वर्मा आए दिन उसके घर के बाहर आकर दबंगई करता है। महिला का आरोप है कि आरोपी लगातार उसे और उसके परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा है, जिससे पूरे परिवार में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।
महिला ने बताया कि बीती 7 जून की रात आरोपी ने घर के बाहर जमकर हंगामा किया। आरोप है कि उसने अभद्र गालियां देते हुए घर पर ईंट-पत्थर फेंके और परिवार को जान से मारने की धमकी दी। अचानक हुई इस घटना से महिला और उसके छोटे बच्चे बुरी तरह सहम गए। घटना के बाद से परिवार में दहशत का माहौल है और बच्चे भी भयभीत हैं।
झारखंड में तैनात सीआरपीएफ जवान ने भी कानपुर पुलिस से अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। जवान का कहना है कि जब देश की सुरक्षा में तैनात जवान ही अपने परिवार की चिंता में रहेगा तो वह पूरी निष्ठा से ड्यूटी कैसे कर पाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद स्थानीय पुलिस ने आरोपी के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की, जिससे उसके हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
पीड़िता का कहना है कि आरोपी के खिलाफ पूर्व में भी थाने में शिकायतें दी गई थीं, लेकिन हर बार मामले को टाल दिया गया। कार्रवाई न होने से आरोपी खुलेआम धमकियां दे रहा है। महिला ने आरोप लगाया कि यदि समय रहते पुलिस ने सख्त कदम उठाए होते तो स्थिति यहां तक नहीं पहुंचती।
लगातार मिल रही धमकियों और उत्पीड़न से परेशान होकर अब पीड़िता ने पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचकर पूरे मामले की शिकायत की है। महिला ने आरोपी के खिलाफ सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज कर तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है। साथ ही अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित कराने की भी गुहार लगाई है।
इस मामले के सामने आने के बाद स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि यदि एक सुरक्षाबल के जवान का परिवार ही खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है तो आम नागरिकों की सुरक्षा व्यवस्था का अंदाजा सहज लगाया जा सकता है। अब देखने वाली बात होगी कि पुलिस प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और पीड़ित परिवार को कब तक राहत मिल पाती है।