कानपुर नगर।
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने बुधवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिठूर का औचक निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने ओपीडी व्यवस्था, दवा उपलब्धता, अभिलेखों तथा मरीजों को प्रदान की जा रही सुविधाओं की समीक्षा की। निरीक्षण के समय चिकित्सक डॉ. श्रद्धा वर्मा, डॉ. राजेश कुमार तथा स्वास्थ्यकर्मी शिवम पाल अनुपस्थित पाए गए। इस पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए तीनों कार्मिकों का एक दिन का वेतन काटने तथा उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने भ्रमण पंजीका का अवलोकन किया तथा ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या और उपचार संबंधी व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने अस्पताल में उपलब्ध दवाओं के स्टॉक का भी निरीक्षण किया और आवश्यक औषधियों की उपलब्धता सुनिश्चित रखने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान आउटसोर्सिंग कार्मिकों ने वेतन समय से न मिलने की समस्या जिलाधिकारी के समक्ष रखी। इस पर जिलाधिकारी ने तत्काल मुख्य चिकित्सा अधिकारी से दूरभाष पर वार्ता कर समस्त आउटसोर्सिंग कार्मिकों का वेतन समयबद्ध ढंग से भुगतान सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य केंद्र पर उपस्थित मरीजों एवं उनके परिजनों से बातचीत कर उन्हें मिल रही सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य केंद्र पर आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी तथा मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग में निदेशक स्तर के पद से सेवानिवृत्त डॉ. हनी मल्होत्रा के कार्यों की भी सराहना की। वर्तमान में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिठूर में आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत तैनात डॉ. मल्होत्रा नियमित रूप से समय पर अस्पताल पहुंचकर मरीजों का उपचार करती हैं। जिलाधिकारी ने उनकी कर्तव्यनिष्ठा और सेवा भावना को प्रेरणादायक बताया।
निरीक्षण के क्रम में जिलाधिकारी ने आयुष्मान आरोग्य मंदिर, बूढ़नपुर का भी निरीक्षण किया, जहां केंद्र बंद मिला। इस पर उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी से जवाब तलब करते हुए आरोग्य मंदिर का नियमित संचालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता शासन की प्राथमिकता है और इसमें किसी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी।