कानपुर। कानपुर कमिश्नरेट के सेंट्रल जोन में पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम को शिक्षा क्षेत्र में सक्रिय एक बड़े फर्जीवाड़ा गिरोह का पर्दाफाश करने में बड़ी सफलता मिली है। बेकनगंज थाना प्रभारी मतीन खान और साइबर सेल प्रभारी तनुज सिरोही के नेतृत्व में की गई संयुक्त कार्रवाई में पुलिस ने तीन शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों में गिरोह का मुख्य सरगना जियाउल हसन उर्फ सतबीर उर्फ आतिफ भी शामिल है, जो लंबे समय से फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्र तैयार करने और देशभर में सप्लाई करने के अवैध कारोबार में सक्रिय था।
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह गिरोह बेहद संगठित और तकनीकी तरीके से काम कर रहा था। आरोपी देश के अलग-अलग राज्यों और शहरों में युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों को निशाना बनाकर हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, विभिन्न डिप्लोमा तथा विश्वविद्यालय स्तर की जाली मार्कशीट और डिग्रियां तैयार करता था। मांग के अनुसार फर्जी दस्तावेज तैयार कर उन्हें कोरियर के माध्यम से अलग-अलग जगहों पर भेजा जाता था।
पुलिस टीम द्वारा की गई छापेमारी के दौरान आरोपियों के ठिकानों से भारी मात्रा में उपकरण और दस्तावेज बरामद किए गए हैं। इनमें अत्याधुनिक डिजिटल प्रिंटर, डाई, विभिन्न प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों की जाली मुहरें, बड़ी संख्या में तैयार और अर्ध-निर्मित फर्जी प्रमाण पत्र शामिल हैं। पुलिस के अनुसार इन उपकरणों का इस्तेमाल असली जैसे दिखने वाले दस्तावेज तैयार करने में किया जाता था।
जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों के बैंक खातों में लाखों रुपये के संदिग्ध लेनदेन के प्रमाण भी मिले हैं। अब तक की जांच में देश के कम से कम आठ नामी विश्वविद्यालयों और शिक्षा बोर्डों के नाम पर फर्जी प्रमाण पत्र तैयार किए जाने के पुख्ता साक्ष्य सामने आए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरोह का नेटवर्क काफी बड़ा है और इसके तार कई राज्यों तक फैले हो सकते हैं। जांच में यह भी पता चला है कि गिरोह के कुछ सदस्य पहले भी इसी तरह के मामलों में जेल जा चुके हैं।
फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस अब नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है। बेकनगंज पुलिस और साइबर सेल की इस संयुक्त कार्रवाई को शिक्षा जगत में सक्रिय फर्जी डिग्री सिंडिकेट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।
फर्जी डिग्री रैकेट का भंडाफोड़